बबूल
मनोरमा जैन ‘पाखी’ भिंड(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* मन के मरुथल में हैं बो दिये बबूल, करते तन छलनी पर हैं मुझे कबूल। सौगात मिली है जो मुझको कैसे करूँ इंकार, सारे गम हैं करते हम पर अब अपना अधिकार। चुभते हैं दिल में हरपल बनकर जैसे शूल, करते तन छलनी पर हैं मुझे कबूल…॥ मैंने एक ख्वाब … Read more