हौंसला
ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* अब दुर्गम मार्गों पर बढ़ चले हैं पांव मेरे, कठिन है यह राह इतनी थक गए हैं पांव मेरे। इस सूने रास्ते में याद कल की आ रही है, व्यर्थ में जीवन गंवाया पानी-सा मैं धन बहाया, याद जब आती है उसकी कांपते हैं पांव मेरे। दूर है मंज़िल मेरी, पर … Read more