सफर-ए-दास्ताँ

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** सफर यह एक ऐसा शब्द है जो अपने-आपमें बहुत विशाल है। सफर एक ऐसी रोमांचकारी धुन है जो इन्सान में ऐसे सवार रहती है जैसे शरीर में प्राण। यह प्राण,प्राणियों को उनके होने और उनके अस्तित्व को जिंदा रखने के लिये बेहद आवश्यक है। जिंदगी में सदैव बस ‘सफर’ ही … Read more

अर्ध नारीश्वर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** तू नारी हम पुरुष, तू जीवन हम रूह तू जननी हम सर्जक, तू नव किसलय हम तरु तू श्रद्धा हम साधक, तू लज्जा हम वाहक तू ममता हम नायक, हम नौका तू पतवार तू करुणा हम साहस, तू कशिश हम अहसास, हम जीवन तू मुस्कान तू शक्ति हम … Read more

मुस्कान

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** अधरों पर दिख जाती है बस,वो मुस्कान नहीं होती है, खिले अधर ही खुशियों की,सच पहचान नहीं होती है। भूखे बच्चों के हाथों में,गर एक निवाला होता है, दीन-दुखी की कुटिया उसका,सत्य शिवाला होता है। बहू-बेटियों के रक्षण का,जब संकल्प लिया जाता है। घर के बड़े-बुजुर्गों को भी,उनका मान दिया … Read more

चुनाव

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** देखैं किसके सिर सजे, मोर मुकुट का पांख। कौन चले शेरों तरह, कौन दबाता आँख॥ लूटा है जिसने बहुत, पाकर के सरकार। वह नेता ही कह रहे, हम हैं पालनहार॥ अपने-अपने राग हैं, अपने-अपने दाँव। वो गाँव की बात करैं, नहिं देखा जो गाँव॥ जो महलों ने हैं जने, पाई … Read more

सागर

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* सब नदियों का मीठा पानी, सागर में ही आता है। इसमें क्या गुण है ऐसा, जो ये खारा ही रह जाता है। मीलों तक फैला है फिर भी, प्यासा ये रह जाता है। इंसानी फ़ितरत भी ऐसी, सागर जैसा बन जाता है। अपने प्रिय की आँखों में, जो आँसू … Read more

आज पत्रकारिता की डिग्री तो है,लेकिन जानकारी नहीं होने से उल्टा हो रहा

 देअविवि में `डिजिटल मीडिया और हिन्दी:संभावनाएं एवं चुनौतियां` पर संगोष्ठी में बोले श्री आर्य   इंदौरl पुराने पत्रकारों के पास पत्रकारिता की डिग्री नहीं होती थी,लेकिन जानकारी पूरी होती थी। आज पत्रकारों के पास पत्रकारिता की डिग्री तो होती है,लेकिन जानकारी नहीं होती है,यह उल्टा काम हो रहा है। यह बात देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की … Read more

`जंगली` सुंदर,पर दिल तक नहीं पहुची जंगल और इंसान की दोस्ती

इदरीस खत्री इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************* निर्देशक-चक रसैल और अदाकार-विद्युत जामवाल,अक्षय ओबेराय,आशा भट्ट,अतुल कुलकर्णी,मकरन्द देशपांडे,पूजा सावन्त एवं विश्वनाथ चैटर्जी हैंl कहानी-रितेश शाह,पटकथा-एडम प्रिंस,चक रसैल की है तो संगीत- समीरउद्दीन ने दिया हैl एक्शन-परवेज शेख और चुंग ली का हैl फिल्म जंगली का फिल्मांकन मार्क इरविन ने किया हैl दोस्तों,दुनिया की सबसे खूबसूरत रचना है इंसान,यदि इंसान को … Read more

आसमानी

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* चखना चाहती हूँ, नीले आसमाँ को। क्या वो भी होता होगा! सागर की तरह खारा। लहरें कभी मचलती होंगी वहाँ भी, चाँद के तट पर बैठकर, छूना चाहती हूँ लहरों को। कोई संगीत तो वहाँ भी, जरूर गुनगुनाता होगा। नर्म रेत पर कोई , अपने प्रेयस का नाम लिखता होगा। अपनी … Read more

शिवाजी,जनरल स्कीन और मोदी

राकेश सैन जालंधर(पंजाब) ***************************************************************** २७ मार्च की सुबह ११.१६ बजे का समय उस समय इतिहास में दर्ज हो गया,जब भारत ने अंतरिक्ष युद्ध के क्षेत्र में पदार्पण किया। यह गौरवशाली कारनामा करके देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतिहास के उन महापुरुषों की श्रेणी में शामिल हो गए,जिन्होंने अपने-अपने समय में देश की रक्षा के समक्ष … Read more

नेताजी

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** देखो सज-धज कर नेताजी आए हैं, सब जन हेतु साथ खुशियां लाए हैं, देखो सज-धज कर नेताजी आए हैं, दर्शन इनके पाँच साल में हो पाए हैं, काका-काकी दादा-दादी दौड़े आओ, संग पड़ोसियों को तुम जोड़े लाओ, मिले भाग्य से हमें नेताजी के साए हैं, देखो सज-धज कर … Read more