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समर्पण

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
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त्याग समर्पण कीजिए,मातृभूमि हित मान।
देश बचे माँ भारती,भली शहादत शान॥

करें समर्पण देशहित,निज के गर्व गुमान।
देश आन अरु शान है,हो इसका सम्मान॥

मानव हूँ मानव बनूँ,मानवता सद्ज्ञान!
जीना मरना देश हित,यह अभिलाषा मान॥

अधिकारों की दौड़ में,रहे भान कर्तव्य।
मेरा देश महान है,सफल तभी मन्तव्य॥

संसद व संविधान का,करो सदा सम्मान।
न्यायालय सर्वोच्च है,लोकतंत्र की शान॥

जनहित परहित देशहित,मेरा भी दायित्व।
देश रहे आजाद तो,है सबका अस्तित्व॥

किया समर्पित देशहित,जिसने जीवन गात।
अमर वही तो हो रहे,बाकी पीले पीले पात॥

देखो पन्ना धाय ने,किया पूत कुर्बान।
कहे समर्पण की कथा,गर्वित शान जुबान॥

मानवता ही धर्म है,सब धर्मों का सार।
राष्ट्रधर्म सबसे बड़ा,रखिए उच्च विचार॥

चलो लेखनी देशहित,लिख दोहा अरु छंद।
करें समर्पण आपको,मिटा सभी मन द्वंद॥

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा हैl आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) हैl वर्तमान में सिकन्दरा में ही आपका आशियाना हैl राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन(राजकीय सेवा) का हैl सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैंl लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैंl शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः हैl

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