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मत जाओ परदेश

उमेशचन्द यादव
बलिया (उत्तरप्रदेश) 
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दूर के ढोल सुहावने लगे,
गाँव से लोग शहर में भागे।

शहर तो है ज़हर का डब्बा,
बेलगाम है बेगम का अब्बा।

पैसे वाले सब रौब जमाते,
मजदूरों को खूब सताते।

कोल्हू के बैल-सा काम करवाते,
वेतन माँगने पर आँख दिखाते।

पसीना परदेशी बहाते,
मालिक ए.सी. में मौज उड़ाते।

मेहनत की परदेशी खाते,
स्थानीय उन पर रौब दिखाते।

श्वान गली में बनते शेर,
परदेशी से रखते बैर।

सोच-विचार कर कहे ‘उमेश’,
रहो गाँव,मत जाओ परदेश॥

परिचय–उमेशचन्द यादव की जन्मतिथि २ अगस्त १९८५ और जन्म स्थान चकरा कोल्हुवाँ(वीरपुरा)जिला बलिया है। उत्तर प्रदेश राज्य के निवासी श्री यादव की शैक्षिक योग्यता एम.ए. एवं बी.एड. है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षण है। आप कविता,लेख एवं कहानी लेखन करते हैं। लेखन का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना,हिंदी भाषा का विकास और प्रचार-प्रसार करना है।

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