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एक प्यारा-सा गीत लिखता हूँ

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’
मोहाली(पंजाब)

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काव्य संग्रह हम और तुम से…

तुम्हें मैं एक प्यारा-सा गीत लिखता हूँ,
तुम्हारे लिए आज सुनहरी प्रीत लिखता हूँ।

ये सुहानी हवा दुआ कर रही हैं तुम्हारे लिए,
सबकी ओर से मैं तुम्हें मीत लिखता हूँ।

आकाश का चमकता चाँद इतराने लगा है मुझ पर,
इनको बता दूं कि मैं प्रेम की ही जीत लिखता हूँ॥

आधुनिक युग ने परम्पराओं का खंडन कर दिया,
आज मैं तुम्हारे लिए नई-नई रीत लिखता हूँ।

आज भी लोग डरा-धमकाकर निकाल रहे हैं काम,
पर मैं कभी नहीं किसी को कोई भीत लिखता हूँ॥

ये कलरव भी सूना-सूना है प्रेम के गीत बिन,
लेकिन तुम्हें मैं एक प्यारा-सा गीत लिखता हूँ॥

परिचय-प्रेमशंकर का लेखन में साहित्यिक नाम ‘नूरपुरिया’ है। १५ जुलाई १९९९ को आंवला(बरेली उत्तर प्रदेश)में जन्में हैं। वर्तमान में पंजाब के मोहाली स्थित सेक्टर १२३ में रहते हैं,जबकि स्थाई बसेरा नूरपुर (आंवला) में है। आपकी शिक्षा-बीए (हिंदी साहित्य) है। कार्य क्षेत्र-मोहाली ही है। लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल और कविता इत्यादि है। इनकी रचना स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में छपी हैं। ब्लॉग पर भी लिखने वाले नूरपुरिया की लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक कार्य एवं कल्याण है। आपकी नजर में पसंदीदा हिंदी लेखक-मुंशी प्रेमचंद,जयशंकर प्रसाद, अज्ञेय कमलेश्वर,जैनेन्द्र कुमार और मोहन राकेश हैं। प्रेरणापुंज-अध्यापक हैं। देश और हिंदी के प्रति विचार-
‘जैसे ईंट पत्थर लोहा से बनती मजबूत इमारत।
वैसे सभी धर्मों से मिलकर बनता मेरा भारत॥
समस्त संस्कृति संस्कार समाये जिसमें, वह हिन्दी भाषा है हमारी।
इसे और पल्लवित करें हम सब,यह कोशिश और आशा है हमारी॥’