रचना पर कुल आगंतुक :549

मेवाड़ मुकुट

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’ 
गोरखपुर(उत्तर प्रदेश)

***********************************************************

‘महाराणा प्रताप और शौर्य’ स्पर्धा विशेष……….


राजपूताना ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि,
रक्त स्राव की धारा घाव की पीड़ा।

युद्ध भूमि का पराक्रम,साहस,शक्ति,शौर्य की प्रतिष्ठा,
परिभाषा पहचान,शान,स्वाभिमान संग्राम का सांगा राणा।

सूरमा रण का रणंजय,महारथी,मृत्युंजय सांगा राणा मेवाण मुकुट का नगीना,
राजपूताना संस्कृति संस्कार युग गूंज शंखनाद माटी का कण-कण गवाह।

राणा सांगा के रक्त से रणभूमि चित्तौड़ मेवाण की धन्य धरा लाल,
सौभाग्य भूमि चंदन-सी माटी युग प्रेरणा शिरोधार्य का अभिमान।

उदय नव सूर्योदय का प्रखर निखर प्रचंड प्रवाह,
वीर,वीरता के वंश हंस का धरोहर मेवाड़ का युवराज।

सांगा के पराक्रम की पराकाष्ठा का अक्षुण्ण अभिमान,सिंह,
जीवन वात्सल्य से ही आँख-मिचौनी खेलता।

जिंदगी को कभी इतिहास की धरोहरों में समेटता,
कभी पन्ना धाय के त्याग बलिदान की परीक्षा का परिणाम।

कभी वीरता-धीरता का कायर परिधान,
पुरुषार्थ की व्याख्या का प्रत्यक्ष प्रामाणिक, पुरुष,काल।

कर्तव्य,दायित्वों के साहासिक उद्देश्यों का विकट विकराल,
विजयी,विजेता गिरते,उठते-संभलते जीवन यात्रा के दृढ़ संकल्प के मुस्कान का वृतांत।

उदय का उदित होना मेवाड़ के इतिहास,त्याग बलिदान,
राजपूताना परम्परा के उत्कर्ष वर्चस्व की वीरता के अंकुरण का अवसर विश्वास।

निर्माण की सौम्यता विनम्रता,साहस कठिन चुनौतियों का वरण,
विजित करने का संकल्प उदय की तेज तेजस्वी धैर्य शौर्य सबेरा का महाकाल।

काल की निरन्तरता के प्रवाह की नई पहचान,
प्रताप चित्तौड़ के स्वर्णिम स्वाभिमान के संसार का उदयीमान।

सांगा के संग्राम समर के विकट कराल विकराल पौरुष का पुरुषार्थ,
राणा प्रताप युग प्रज्वलित प्रेरणा का परम प्रकाश!

राजपूताना गर्व,शान सूर्योदय उदय उदित भय के बादल अनिश्चित शक, शंका अविश्वास का आकाश,
डोलती अवनि के डगमगाते अस्तित्व अस्मत के विश्वास वर्चस्व का खंड-खंड।

अखंडता की विरासत के अन्धकार के विहान वैभव भविष्य का आखिर प्रयास,
पुरुषार्थ की प्रतीक्षा के अगमन की श्वांस!

मेवाड़ के महत्व-महिमा का वीर चित्तौड़ अभिमान की पहचान,
स्वयं वात्सल्य ममता के आँचल की ढाल डर भय से अनजान।

मेवाड़ की आशाओं का सूरज-चाँद का उदय,
सिंह उदय पन्ना धाय का त्याग बलिदान।

स्वर्णिम अध्याय का उत्कर्ष पन्ना राजपूताना स्वाभिमान की तेज मिशाल मशाल का सत्य सत्यार्थ।

निःस्वार्थ,सेवा,त्याग,बलिदान की पराकाष्ठा की पूर्णिमा का चाँद,
ममत्व की महान परवरिश चित्तौड़ मेवाड़ की धन्य धरोहर।

राजपूताना वैभव का आधार उदय नई सुबह की मर्यादा का अक्षुण्ण प्रवाह,
आक्रांता,क्रूर,कुटिल लुटेरे,सोने की चिड़िया भोले भारत भारतीय के भावों को रौंदते।

खंड-खंड में विभक्त खोखले मतभेदों में लड़ते-झगड़ते,
जिस डाल बैठे,कटाते उसी डाल को भारत में भारतीयों के द्वेष-दंभ- अहंकार।

तार-तार शर्म,शर्मसार की नियति,नित्य निरन्तर का पल प्रहर,
दिन,महीने,साल युग की शुरुआत।

गजनवी के सत्रह प्रहार के सोमनाथ की कराह,
तैमूर की क्रूरता का भयावह,अत्याचार।

गोरी के युद्ध कौशल को धूल धूसरित करता पृथ्वी पराक्रम,
पुरुषार्थ का चौहान गद्दारी धोखे का बलिदान।

अल्लाउद्दीन की दुष्टता में नारी मर्यादा पद्मावती,
राजपूताना वीरांगनाओं के जौहर की ज्वाला में तपती माँ भारती की आँखों के आँसू का प्रवाह!

बाबर के विध्वंस,विनाशकारी दमन, दुष्टता के तांडव का नंगा नाच,
सत्य सनातन के अवशेषों की कराह प्रलाप विलाप!

रानी कर्मवती का भावों के भाई हुमायूं से रक्षा की व्यर्थ गुहार,
युग के राणा संग्राम,सांगा,उदय माँ भारती की कोख की लाज़ लाज़बाब योद्धा!

विवशता के धैर्य धरातल के भावों पराजय के रिश्तों का सत्कार,
अकबर विनम्रता सहिष्णुता का छद्म,छल, कपट व्यवहार।

संस्कृति-संस्कारों के संस्करण का भारत भारतीयता पर कुटिल चाल,
राजा मान स्वाभिमान की शक्ति हस्ती कपट धरातल का अहंकार।

युग को जीवेत जाग्रतम योद्धा की आवश्यक आवश्यकता की चाह राह पुकार,
युग का शौर्य सूर्य ने बदला,करवट नई सुबह के महापराक्रम त्याग का पुरुषार्थ।

संग्राम के सिंह शेर सांगा के धैर्य वीर का मेवाड़ मुकुट राणा महायोद्धा युग प्रताप प्रकाश,
कठिन चुनौती में जन्मा विकट विरासतों की जिम्मेदारी कर्तव्य बोध का महान महाराणा प्रताप।

संग्राम भूमि की दहशत दहाड़,शक्ति के मद में मदमस्तों की दहशत,
हुंकार परपिता के हर घाव का सयुंक्त हिसाब अस्सी किलो का भाला महाराणा की भुजाओं का श्रृंगार।

पवन वेग शत्रु पर प्रहार का चैतन्य चेतक,
प्रताप की प्रबल पराकाष्ठा के युद्ध कौशल की धरातल धार।

हार को दरकिनार शत्रु की शक्ति साहस का नाश,
महाराणा,सांगा संग्राम रक्त की युग चमक स्वाभिमान।

पूर्ण,पूर्णता का पुरुष पुरूषार्थ झुकाना टूटना कायरता के वैभव का परित्याक्त,
प्रतिज्ञा,वचनबद्धता जीवन का सिद्ध सिद्धांत।

घास की रोटी अवनि पर शयन वन-वन मातृभूमि की स्वतंत्रता रक्षा का संकल्प,
यज्ञ यतन कौड़ी-कौड़ी के लिए संघर्ष मगर मातृभूमि का स्वाभिमान,नहीं झुकने दिया सर।

लड़ता गिरता उठता संभलता विजय पराजय विजय की विजयी युग मुस्कान,
महानता का पुण्य प्रताप मेवाड़ का सूरज भारत में नव सूर्योदय का भान मान!

भामाशाह की मित्रता मित्र मानव मानवता का शिखर,
श्रेष्ठ श्रेष्ठतम रणंजय योद्धा भामा का सच्चा सार्थक मान महत्व स्वाभिमान!

जब-जब होगी मातृभूमि की ललकार हर युवा हृदय से उठेगी हुंकार,
गूँजेगा मातृभूमि की रक्षा स्वतंत्रता की पुकार महाराणा की आवाज़।

मर्यादा की मांग यही है राणा सांगा, संग्राम,महाराणा के त्याग बलिदान,
प्रेरणा के प्रकाश की पराकाष्ठा का युग अलख का आव्हान।

महाराणा के मूल्यों का आदर्श संवर्धन राष्ट्र आराधन,
मातृभूमि रक्षा,राष्ट्र आराधन,राष्ट्र आराधन।

महाराणा प्रताप का युद्ध कौशल और पराक्रम,
हल्दी घाटी में हुई युद्ध की ललकार।

मुगलों की भारी सेना से राजपूताना के कुछ सीमित वीरों का सामना,
हर वीर राजपूत था भारत माता के स्वाभिमान का रक्षक।

वीर सपूत राजस्थान चित्तौड़ मेवाड़ का सच्चा जज्बा और जूनून,
ली एक शपथ ही थी मेवाड़ भारत के सम्मान की बुनियाद।

आज़ाद भारत का बिगुल बजाएंगे,मर जाएंगे,
हँसते-हँसते पीछे कदम नहीं हटाएंगे।

रणभूमि में हर मुग़ल सिपाही को राजपूताना,शक्ति,शौर्य की परम्परा का लोहा हम मनवाएंगे,
देकर बलिदान मातृभूमि का मान हम बढ़ाएंगे।

राणा का भाला बोला,दुश्मन का सिंघासन डोला,
हल्दी घाटी की युद्ध भूमि में राणा की वीरता पुरुषार्थ बोला।

सिंह की दहाड़ से दुश्मन की सेना त्राहि-त्राहि बोल,
उदयसिंह रणबांकुरा संग्राम के लहू की ललकार।

दुश्मन भी जय भवानी भारत की जय बोले,
महान योद्धा देश भक्त मेवाड़ राजस्थान भारत का अभिमान महाराणा प्रताप॥

परिचय–एन.एल.एम. त्रिपाठी का पूरा नाम नंदलाल मणी त्रिपाठी एवं साहित्यिक उपनाम पीताम्बर है। इनकी जन्मतिथि १० जनवरी १९६२ एवं जन्म स्थान-गोरखपुर है। आपका वर्तमान और स्थाई निवास गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) में ही है। हिंदी,संस्कृत,अंग्रेजी और बंगाली भाषा का ज्ञान रखने वाले श्री त्रिपाठी की पूर्ण शिक्षा-परास्नातक हैl कार्यक्षेत्र-प्राचार्य(सरकारी बीमा प्रशिक्षण संस्थान) है। सामाजिक गतिविधि के निमित्त युवा संवर्धन,बेटी बचाओ आंदोलन,महिला सशक्तिकरण विकलांग और अक्षम लोगों के लिए प्रभावी परिणाम परक सहयोग करते हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत,ग़ज़ल,नाटक,उपन्यास और कहानी है। प्रकाशन में आपके खाते में-अधूरा इंसान (उपन्यास),उड़ान का पक्षी,रिश्ते जीवन के(काव्य संग्रह)है तो विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। ब्लॉग पर भी लिखते हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-भारतीय धर्म दर्शन अध्ययन है। लेखनी का उद्देश्य-समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करना है। लेखन में प्रेरणा पुंज-पूज्य माता-पिता,दादा और पूज्य डॉ. हरिवंशराय बच्चन हैं। विशेषज्ञता-सभी विषयों में स्नातकोत्तर तक शिक्षा दे सकने की क्षमता है।
अनपढ़ औरत पढ़ ना सकी फिर भी,
दुनिया में जो कर सकती सब-कुछ।
जीवन के सत्य-सार्थकता की खातिर जीवन भर करती बहुत कुछ,
पर्यावरण स्वच्छ हो,प्रदूषण मुक्त हो जीवन अनमोल हो।
संकल्प यही लिए जीवन का,
हड्डियों की ताकत से लम्हा-लम्हा चल रही हूँ।
मेरी बूढ़ी हड्डियां चिल्ला-चीख कर्,
जहाँ में गूँज-अनुगूँज पैदा करने की कोशिश है कर रही,
बेटी पढ़ाओ,बेटी बचाओ,स्वच्छ राष्ट्र, समाज,
सुखी मजबूत राष्ट्र,समाज॥

Leave a Reply