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मेरे राम

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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युगों-युगों से शीर्ष पुरुष हो,
मर्यादाओं के भरे कलश हो
जीवन के पावन संस्कार हो,
करुणा की अविरल धार हो।
प्राणों का तुम एक नाम हो,
हाँ,तुम ही बस मेरे राम हो…॥

हैं तुम्हीं में सारे तीर्थ समाते,
चारों धाम तुम्हीं तक आते
नदियाँ सारी चरण चूमतीं,
सागर की लहरें हैं झूमती
जीवन का तुम विश्राम हो।
हाँ,तुम ही बस मेरे राम हो…

भावनाओं का तुम संगम,
तुम्हीं उजाला तुम्हीं तम
तुम्हीं हो बंसीवाले मोहन,
तुम्हीं हो राधा की चितवन
मुखड़े से नयनाभिराम हो।
हाँ,तुम ही बस मेरे राम हो…

तुम्हीं प्रेम हो तुम्हीं त्याग हो,
तुम्हीं रागिनी तुम्हीं राग हो
तुमसे है जीवन की कविता,
तुम शब्दों की बहती सरिता
तुम अर्द्ध और पूर्ण विराम होl
हाँ,तुम ही बस मेरे राम हो…,
हाँ,तुम ही बस मेरे राम होll

परिचयडॉ. अनिल कुमार बाजपेयी ने एम.एस-सी. सहित डी.एस-सी. एवं पी-एच.डी. की उपाधि हासिल की है। आपकी जन्म तारीख २५ अक्टूबर १९५८ है। अनेक वैज्ञानिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित डॉ. बाजपेयी का स्थाई बसेरा जबलपुर (मप्र) में बसेरा है। आपको हिंदी और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। इनका कार्यक्षेत्र-शासकीय विज्ञान महाविद्यालय (जबलपुर) में नौकरी (प्राध्यापक) है। इनकी लेखन विधा-काव्य और आलेख है।