विष्णुपद मंदिर की अधिष्ठात्री मालवा की महारानी अहिल्याबाई

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* बिहार का गया क्षेत्र बहुत ही पुराना धार्मिक स्थल है। यहाँ दूर-दूर के हिन्दू अपने पितरों का पिण्डदान करने आते हैं। वे भारत के या नेपाल के हों या सुदूर मॉरिशस आदि अन्य हिन्दू-प्रवासी देशों के,वे सभी अपने पितरों के पिण्ड दान करने साल में एक बार शारदीय नवरात्रा … Read more

नहा रही है चिड़िया

रश्मि लता मिश्राबिलासपुर (छत्तीसगढ़)****************************************************************** धूल धूसरित देखो तो,नहा रही है चिड़िया।आँगन-आँगन फुदक,ची,ची मचा रही है चिड़िया।च.चकभी आकर मुंडेर बैठी,दाना चुगने की खातिरकभी दाने घोंसले पहुँचातीनन्हें बच्चे हैं आतुर।कभी फलों को कुतर रही,कभी तलाश में पानी की।कोई खेत दिखे ऐसा,जो हरा-भरा हो दाने दे।चुल्लू भर पानी में देखो,सर डुबा रही है चिड़िया।मस्ती में आकर प्यारी वो,नहा … Read more

सृष्टि की जादूगरी

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)***************************************************************** यह सुबह,पंछियों की चहचहाहट,कुछ बोलती गाती यह कोयलचहकती,फुदकती यह गोरैया,कोयल इन दिनों,कुछ ज़्यादा हीकुंहुकती है।कभी लगता है उसकी,कुहू-कुहू से चीख-चुभनमचाती है।दिनभर यह रंग-बिरंगी,छोटी-सी चिड़िया जाने किससेबतियाती है।कभी कबूतरी की गुटर-गूं,मन भटकाती है।आम और पीपल के इस पेड़ पर,जाने कितने ही पंछियों नेअपने आशियाने बना लिए हैं।इन दिनों,यह सब,दिनभर जाने किसकोअपने सारे … Read more

शौर्य प्रतीक महाराणा प्रताप

गोपाल मोहन मिश्र दरभंगा (बिहार) ******************************************************************************** ‘महाराणा प्रताप और शौर्य’ स्पर्धा विशेष………. अकबर की इस बात से हर कोई हैरान था, प्रताप को झुकाने के लिए आधा हिन्दुस्तान देने को तैयार थाI पर मेवाड़ी सरदार को अपनी स्वतन्त्रता से प्यार था, इसलिए उसकी लालच भरी शर्त से इन्कार थाI हल्दीघाटी के युद्ध में, प्रताप की … Read more

वह प्रताप था,अडिग रहा

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** ‘महाराणा प्रताप और शौर्य’ स्पर्धा विशेष………. एक-एक करके झुक गए थे, सब जिसके दरबार में। नाकों चने चबवाए लेकिन, मुगलों को प्रताप ने। बदल रहा इतिहास तभी तो पाठ्यक्रम में आज है। महानता का अकबर के सर नहीं, प्रताप के सर रखो ताज है। हल्दी घाटी के आँगन में, … Read more

महाराणा प्रताप की पुकार और हल्दी घाटी का संदेश

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’ इन्दौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************************** ‘महाराणा प्रताप और शौर्य’ स्पर्धा विशेष………. जब राष्ट्र संकटकाल में हो,तो हर को नागरिक सैनिक हो जाना चाहिए। महाराणा और मुगलों के संघर्ष में उनके अपने भी अकबर के चरणों की धूल चाट रहे थे,परंतु महाराणा की अपनों की परिभाषा रक्त सम्बन्ध और रिश्तेदारी से परे थी,जो देश का … Read more

तेरी कहानी ढूँढता हूँ!

गोपाल मोहन मिश्र दरभंगा (बिहार) ******************************************************************************** वक्त के अखबार में तेरी कहानी ढूँढता हूँ। उम्र के इस आइने में इक निशानी ढूँढता हूँ। दौर मिट जाएँ भले मिटते नहीं जज्बात दिल के, ले चले उस दौर में फिर वो रवानी ढूँढता हूँ। जब तेरी महफ़िल में लुटकर दूर बैठा रौशनी से, रात के साये तले … Read more

वट-सावित्री की वेदी पर

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र) पटना (बिहार) ****************************************************************************** मेरे गाँव का यह बरगद पेड़,मुझसे बहुत बड़ा है। मैं अब तेरासी ग्रीष्म को पार करनेवाला ही हूँ। खैर,बात बरगद पेड़ की उठी थी तो जब मैं बच्चा था,वट-सावित्री व्रत-पूजा के दिन मैं भी अपनी माँ के साथ इस पेड़ के पास जाता था और माँ की … Read more

`आत्मनिर्भर भारत` के सपने और चुनौतियां

गोपाल मोहन मिश्र दरभंगा (बिहार) ******************************************************************************** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने `कोरोना` प्रकोप से त्रस्त,आर्थिक नजरिए से ध्वस्त और अंतर्मन से जले-भुने भारतवासियों के लिए २० लाख करोड़ रुपए के जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है,वह बदलते वक्त के लिहाज से दूरदर्शितापूर्ण कदम है। साथ ही जितनी चतुराई से उन्होंने स्थानीय को आवाज यानि `लोकल … Read more

माटी का क़र्ज़

डॉ. विभाषा मिश्र रायपुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************************** मानवता की मिसाल बनकर, सबके लिए वरदान बन इस मिट्टी से उपजा है तो, इस मिट्टी के लिए ही महान बन। धरती माँ न तेरी न मेरी, यह तो सबकी माता है इसने कभी नहीं बाँटा ख़ुद को, फिर क्यों तू बाँटने लगा इसको। देख ले मिट्टी भी एक दिन, … Read more