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वृक्षों से सीखना चाहिए जल का महत्व

प्रो.स्वप्निल व्यास
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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पौधे बोलते नहीं,मगर पानी के महत्व को बहुत अच्छी तरह उजागर करते हैं। वे जल प्राप्त करने के लिए सभी प्रयास करते हैं,मगर पानी का दुरुपयोग नहीं करते। प्राप्त पानी को संभल-संभल कर खर्च करते हैं। पानी बरतने को लेकर पौधों में इतनी प्रवीणता उत्पन्न हो गई है कि हम पौधों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। पानी का उपयोग करने में सभी पौधे एक-सा व्यवहार नहीं करते हैं। जल की उपलब्धता व जल की गुणवत्ता के अनुसार पौधों का व्यवहार अलग-अलग तरह का होता है। यह विविधता पौधों में विकासवादी प्रक्रमों के कारण आई है। पौधे पृथ्वी पर मानव की अपेक्षा करोड़ों वर्ष पहले से विद्यमान हैं, इसलिए जीवनाधार जल को लेकर उन्होंने विकास के अदभुत चरण तय किए हैं।
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मानव ने वर्षाजल को एकत्रित करने व बाद में सावधानी से खर्च करने की बात भी पौधों से ही सीखी है। नागफनी,ग्वारपाठा,थोर आदि कई मांसल पौधे हैं,जो रेगिस्तान में आसानी से रह लेते हैं। ये पादप वर्षा के दिनों में उपलब्ध जल को अपने तने या पत्तियों में संग्रहित कर लेते हैं। अगामी वर्षा ऋतु तक इसी जल को सावधानी से खर्च करते हैं। जल के अपव्यय को रोकने के सभी उपायों को ये पादप काम में लाते हैं। सर्वाधिक जल खर्च करने वाले पादप भाग पत्तियों को ये भी त्याग देते हैं,या रूपान्तरित कर लेते हैं। तना हरा होकर पत्तियों की भोजन बनाने की जिम्मेदारी सम्भाल लेता है।
मानव ने भी कुछ सीमा तक पौधों का अनुकरण किया,मगर अब आवश्यकता पौधों जैसी गम्भीरता लाने की है। जितना जल्दी हम इस बात को समझेंगे तथा दूसरों को समझाएँगे,उतना ही अच्छा रहेगा।

परिचय-प्रो.स्वप्निल व्यास का निवास इंदौर में ही है। आपकी जन्मतिथि ३ जुलाई १९८४ तथा जन्म स्थान-इंदौर है।  मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर वासी प्रो.स्वप्निल व्यास ने वाणिज्य में स्नातक पश्चात पत्रकारिता में भी स्नातक-स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के साथ ही पीजीडीबीए,एमबीए,समाज कार्य विषय में एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर कर लिया है। आपका कार्य एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक का है। सामाजिक गतिविधि-के अंतर्गत सामुदायिक परामर्शदाता का कार्य भी करते हैं। आपकी लेखन विधा-लेख और कविता है,जबकि प्रेरणा पुंज-माता-पिता हैं। स्वप्निल जी के लेखन का उद्देश्य-जागृति,संवाद के लिए स्वतन्त्र लेखन करते रहना है।

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