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‘वीणा’ ने साहित्य और संस्कृति दोनों का संवर्धन किया

इंदौर (मप्र)।

‘वीणा’ पत्रिका ने साहित्य और संस्कृति दोनों का संवर्धन किया है, जिसके परिणामस्वरुप वह आज शताब्दी के शिखर को स्पर्श करने जा रही है। ‘वीणा’ संवाद केन्द्र की शताब्दी श्रृंखला में हम हर बार अलग-अलग विषयों पर विद्वानों को बुलाकर उनको सुनते हैं, उसी श्रृंखला में आज दोहा एवं समिति समाचार पर समिति परिवार के दोनों वक्ता बात रखेंगे।
   श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति में ‘वीणा’ संवाद केन्द्र द्वारा ‘वीणा की शताब्दी और दोहा’ तथा ‘वीणा की शताब्दी और साहित्यिक समाचार’ विषयों पर आयोजित कार्यक्रम में विषय का प्रवर्तन करते हुए ‘वीणा’ के संपादक राकेश शर्मा ने यह बात कही।
   प्रभु त्रिवेदी ने ‘वीणा’ पत्रिका के आदिकाल में प्रकाशित दोहों से अपनी बात आरंभ करते हुए अभी तक इस विधा को पूरा सम्मान देने वाली पत्रिका का जिक्र किया। प्रचार मंत्री हरेराम वाजपेयी ने कहा कि ‘वीणा’ पत्रिका के अंतिम पृष्ठों में ‘समिति समाचार’ ‘वीणा’ का एक महत्वपूर्ण प्रखण्ड है, जिसमें समिति में सम्पन्न कार्यक्रमों के साथ अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी शामिल होती हैं। ‘वीणा’ ने अपने समाचारों में इतिहास, संस्कृति और वैचारिक विमर्श को महत्व दिया है। इस तरह ‘वीणा’ पत्रिका सारस्वत बेटी है, जिसने अपनी माँ के गौरव को साहित्य जगत में पहुंचाने में अहम भूमिका का निर्वाह किया। अध्यक्षीय उद्बोधन समिति में प्रधान मंत्री अरविन्द जवलेकर ने ‘वीणा’ के शताब्दी सन्दर्भ कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला।
    संचालन वीणा संवाद केन्द्र की संयोजक अंतरा करवडे ने किया। आभार प्रदीप नवीन ने किया।