ईद

अकबर खान 

उदयपुर(राजस्थान)

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चंदा गगन पर आजा, मैं ईद तो मना लूँ,

हमसे बिछड़ गए जो,उनको गले लगा लूँ। 

निहारूँ मैं बार तेरी, कब तक तू ही बता दे

आता हैं प्यार कैसे ? इतना मुझे सिखा दे। 

बढ़ जाऊँ तेरे पथ में,ये पग जो मैं संभालूँ

चंदा गगन पर आजा, मैं ईद तो मना लूँ।

तेरा रूप घटनाबढ़नाऔर ज्योति जग को देना,

छोटा हो या बड़ा हो,का भाव मन में ना लेना

समदृष्टि ज़िंदगी का,यह भाव ही बिठा लूँ,

चंदा गगन पर आजा,मैं ईद तो मना लूँ।

‘शाद’ के सर पर रहकर, करते हो तुम उजाला,

अज्ञान हरने का व्रत,जीवन में अपने ढाला

यही ज्ञान मुझमें भर दे,ख़ुद को सुखी बना लूँ,

चंदा गगन पर आजा,मैं ईद तो मना लूँ॥

परिचय-अकबर खान  को शायर अकबर खान कहलाना पसंद है। जन्म तिथि २ जुलाई १९८० एवं जन्म स्थान-बनारस है। वर्तमान पता उदयपुर स्थित  श्याम नगर(भुवाणा)है। राजस्थान का यही शहर उदयपुर आपका स्थाई निवास है। श्री खान ने कम्प्यूटर अभियंता सहित व्यापार प्रशासन में स्नातकोत्तर और व्यापार प्रबंधन में भी स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। आपका कार्यक्षेत्र-व्यवसाय है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप हिंदी शायरी को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर हिंदी कविता का आयोजन करवाते हैं। लेखन विधा-शेर,रचना और ग़ज़ल है। ब्लॉग पर भी लिखने वाले श्री खान की रचनाओं का   प्रकाशन पत्र-पत्रिकाओं में हुआ है। अकबर खान की लेखनी का उदेश्य-हिंदी भाषा में ग़ज़ल-गीत को बढ़ावा देना है। 

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