मैं हूँ नारी

केवरा यदु ‘मीरा’ 
राजिम(छत्तीसगढ़)
*******************************************************************
मैं ही तो वह नारी हूँ,
जो सिंदूर देशहित वारी हूँ।
बेटे के माथे तिलक लगा,
सीमा पर मैं विदा कराती हूँ।
जब ओढ़ कफन तिरंगा आता,
अश्रु आँचल में छुपाती हूँ।
मैं शेरनी महतारी हूँ,
हाँ मैं वही नारी हूँ…॥

मैं रिद्धि हूँ,मैं सिद्धी हूँ,
मैं ही तो मात देवकी हूँ।
मैं हुसैन की माँ फातिमा हूँ,
मैं ही कबीर माँ नीमा हूँ।
मैं राम को गोद खिलाती हूँ,
मैं देवों को दूध पिलाती हूँ।
मैं अनुसुइया बन जाती हूँ,
अपनों पे जान मैं वारी हूँ।
हाँ मैं वही नारी हूँ…॥

मैं ललकार नहीं सहती,
मैं शेर सवारी हूँ करती।
मैं ज्वाला हूँ मैं काली हूँ,
मैं रक्त बीज संघारी हूँ।
मैं आग भी हूँ चिंगारी हूँ,
मैं नहीं द्रोपदी नारी हूँ।
हाँ मैं वही नारी हूँ…॥

मैं दयामयी भोली-भाली हूँ,
मैं शांत कभी वाचाली हूँ।
मैं पिय संग कदम मिलाती हूँ,
मैं अर्धांगनी कहाती हूँ।
मैं कोमल मन लेखिका हूँ,
मैं पिय के दिल मलिका हूँ।
मैं चाहूँ तो जीत जाती हूँ,
मैं बस अपनों से हारी हूँ।
हाँ मैं वही नारी हूँ…॥

मैं सुनीता हूँ,मैं कल्पना हूँ,
मैं साक्षी सिंधु सायना हूँ।
मैं सावित्री बन जाती हूँ,
मैं यम से भी टकराती हूँ।
मैं मीरा बन विष पीती हूँ,
मैं बेटियों के हित जीती हूँ।
मै हिम्मत कभी न हारी हूँ,
हाँ,मैं वही नारी हूँ॥

परिचय-केवरा यदु का साहित्यिक उपनाम ‘मीरा’ है। इनकी जन्म तारीख २५ अगस्त १९५४ तथा जन्म स्थान-ग्राम पोखरा(राजिम)है। आपका स्थाई और वर्तमान बसेरा राजिम(राज्य-छत्तीसगढ़) में ही है। स्थानीय स्तर पर विद्यालय के अभाव में आपने बहुत कम शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र में खुद का व्यवसाय है। सामाजिक गतिविधि के तहत महिलाओं को हिंसा से बचाना एवं गरीबों की मदद करना प्रमुख कार्य है। भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए ‘मितानिन’ कार्यक्रम से जुड़ी हैं। आपकी लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल सहित भजन है। १९९७ में श्री राजीवलोचन भजनांजली,  २०१५ में काव्य संग्रह-‘सुन ले जिया के मोर बात’,२०१६ में देवी भजन (छत्तीसगढ़ी में)सहित २०१७ में सत्ती  चालीसा का भी प्रकाशन हो चुका है। लेखनी के वास्ते आपने सूरज कुंवर देवी सम्मान,राजिम कुंभ में सम्मान,त्रिवेणी संगम साहित्य सम्मान सहित भ्रूण हत्या बचाव पर सम्मान एवं हाइकु विधा पर भी सम्मान प्राप्त किया है। केवरा यदु के लेखन का उद्देश्य-नारियों में जागरूकता लाना और बेटियों को प्रोत्साहित करना है। इनके जीवन में प्रेरणा पुंज आचार्यश्रीराम शर्मा (शांतिकुंज,हरिद्वार) व जीवनसाथी हुबलाल यदु हैं। 

Hits: 5

आपकी प्रतिक्रिया दें.