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आयी होली

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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रंग-रँगीली,
आयी होली
चुन्नू आओ,
आओ मुन्नीl
भर-भर लाओ
तुम पिचकारी,
रंगों की बौछार से कर दो
पीली धरती
नीला अम्बरl
तुम हो गिनी
कितनी भोली,
रंग-रँगीली
आयी होली।
राजू ने
गुब्बारा फोड़ा,
मीना ने
मारी पिचकारी,
हँस-हँस के सब
रंग लगातेl
मस्तानों की
आयी टोली,
रंग-बिरंगी
आयी होली।
भाभी माँ
मिठाई लायी,
चाची ने
गुंजिया खिलाई,
घर-घर बाजे
ढोल-नगाड़े,
खुशियों से
भर-भर
लायी झोलीl
रंग-रँगीली
आई होली।
दादा जी
कब पीछे हटते,
देखो दादी को
वो रंगते,
किसने रंग में
भांग है घोलीl
रंग-रँगीली,
आयी होली।
भूल के सब
आपस के झगड़े,
आओ बोलें
मीठी बोली,
कल तक जो हुई
सो होली,
आज मनाओ
खुशियों की होलीl
ढोल बजाओ
जमकर ढोली,
रंग-रँगीली
आयी होलीll

परिचय-श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता,हाइकु,मुक्तक,ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।