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नारी

रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’ 
कैमूर(बिहार)

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सृष्टि की रचनाकार,
जिनके कई प्रकार,
सागर ममता लिए,
नित्य दिन रहती।
कहलाती कभी दुर्गा,
कभी काली बन जाती,
चंडिका भवानी बन,
पाप नाश करती।
नारी अबला नहीं है,
झाँसी वाली रानी बन,
सामने फिरंगियों को,
काट कर बढ़ती।
क्षेत्र चाहे कोई भी हो,
चहुँओर भाग लिए,
चोटियों गगन तक,
उड़ान भी भरती।

परिचय-साहित्यिक उपनाम ‘रुद्र’ से पहचाने जाने वाले रमेश कुमार सिंह की जन्मतिथि ५ फरवरी १९८५ और जन्म स्थान कान्हपुर कर्मनाशा हैl श्री सिंह वर्तमान में बिहार स्थित उच्चतर विद्यालय रामगढ़ ग्राम-कान्हपुर(जिला-कैमूर) में रहते हैंl बिहार राज्य के कान्हपुर वासी रूद्र ने एम.ए.(अर्थशास्त्र,हिन्दी) एवं बी.एड. की शिक्षा हासिल की है,और कार्यक्षेत्र-शिक्षक(बिहार सरकार) का हैl आप सामाजिक गतिविधि के निमित्त साहित्य सेवा के रुप में साहित्य लेखन के लिए प्रेरित करने के साथ ही सह सम्पादक(पत्रिका)और प्रदेश प्रभारी(एक अन्य पत्रिका में बिहार प्रदेश प्रभारी)हैंl नई कविता,हाइकु,गद्य लेखन सहित मुख्य रुप से छन्दमय रचनाएँ बनाना आपकी लेखन विधा हैl विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं तथा साझा संकलनों में आपकी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैंl सम्मान की बात की जाए तो इनको अब तक विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से ३६ सम्मान प्राप्त हैंl इसमें प्रमुख तौर पर श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान (नई दिल्ली),श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान(नई दिल्ली),सारस्वत सम्मान(नई दिल्ली) सहित दीपशिखा सम्मान(ग्वालियर)और महाकवि रामचरण हयारण मित्र स्मृति सम्मान(जालन्धर,२०१८)हैl आप निजी ब्लॉग पर लिखते हैं तो अन्य और वेबसाइट पर भी रचना उकेरते हैंl श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार करना तथा हिन्दी साहित्य की ओर समाज का झुकाव बढ़ाना हैl