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माँ गरीब नहीं होती

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’
रोहतक (हरियाणा)
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मातृ दिवस स्पर्धा विशेष…………


माँ की लोरी से बढ़कर दुनिया में गाना नहीं होता,
नापे माँ के दिल की गहराई कोई पैमाना नहीं होताl
जब आलीशान महलों में बेताबियां बढ़ जाती हैं,
माँ की गोद-सा कोई जहां में आशियाना नहीं होताll

कुरूप से कुरूप बच्चा माँ को खूबसूरत होता है,
माँ की गोद मिल जाना सबसे बड़ा मुहूर्त होता हैl
हर किसी से दूर होकर तो रह लेती है माँ मगर,
आँखों के सामने खेलता बच्चा जरुरत होता हैll

माँ तेरी आँखों में सारा जहां मिल जाता है,
चारों धामों का इसमें नजारा मिल जाता हैl
तेरी आँखों की चमक से मेरी जिंदगी रोशन है,
क़दमों में सारी जमीं आसमां मिल जाता हैll

तेरी गोद की मरहम से जख्म हर अच्छा होता है,
माँ तेरा हर कदम काशी-मदीना मक्का होता हैl
कितना भी बड़ा हो जाये आदमी दुनिया में पर,
माँ की गोद में आकर तो-वह बच्चा होता हैll

दुनिया की कोई भी माँ गरीब नहीं होती है,
औलाद का नसीब जो बदनसीब नहीं होतीl
मत बांटो उसका बुढ़ापा जग वालों किस्तों में,
माँ तोहफा तो होती है पर चीज नहीं होती हैll

परिचय–डॉ.चंद्रदत्त शर्मा का साहित्यिक नाम `चंद्रकवि` हैl जन्मतारीख २२ अप्रैल १९७३ हैl आपकी शिक्षा-एम.फिल. तथा पी.एच.डी.(हिंदी) हैl इनका व्यवसाय यानी कार्य क्षेत्र हिंदी प्राध्यापक का हैl स्थाई पता-गांव ब्राह्मणवास जिला रोहतक (हरियाणा) हैl डॉ.शर्मा की रचनाएं यू-ट्यूब पर भी हैं तो १० पुस्तक प्रकाशन आपके नाम हैl कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचना प्रकाशित हुई हैंl आप रोहतक सहित अन्य में भी करीब २० साहित्यिक मंचों से जुड़े हुए हैंl इनको २३ प्रमुख पुरस्कार मिले हैं,जिसमें प्रज्ञा सम्मान,श्रीराम कृष्ण कला संगम, साहित्य सोम,सहित्य मित्र,सहित्यश्री,समाज सारथी राष्ट्रीय स्तर सम्मान और लघुकथा अनुसन्धान पुरस्कार आदि हैl आप ९ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल हो चुके हैं। हिसार दूरदर्शन पर रचनाओं का प्रसारण हो चुका है तो आपने ६० साहित्यकारों को सम्मानित भी किया है। इसके अलावा १० बार रक्तदान कर चुके हैं।