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राखी चंदा पहुँच गई…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’
बूंदी (राजस्थान)
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स्नेह के धागे….

पृथ्वी ने भेजी है राखी,
चंदा तक पहुंचाने को
‘विक्रम-प्रज्ञान’ हैं बने संवदिया,
भाई-राखी बंधवाने को।

राखी में भरकर है भेजा,
आठ-अरब का प्यारा-प्यार
‘इसरो’ ने उसको पहुँचाया,
सोलह-बरस, मेहनत का सार।

भारत संग जहान यह सारा,
चंद्रयान पर गर्व करें
उज्ज्वल भविष्य, चमकते सपने,
जन-जन की आँखों में भरे।

लघु को कमतर ना माना करते,
व्यापक सोच के मानक पर
अंतरिक्ष असीम-अपरिमित,
पर होगा प्रज्ञान-असर।

मानवता के कदम बढ़े हैं,
अंतरिक्ष में चाँद की ओर
मंगल, शनि, शुक्र और सूर्य,
छूना हर ब्रह्मांड का छोर।

हाथ तिरंगा, आँखों सपने,
विश्व-गुरु की कसौटी पर
छोटे-छोटे कदमों से चलकर,
बने विश्व इक कुटुम्ब का घर।

देशों के शामिल प्रयासों से ही,
नए गगन तक पहुंच बने
अंतरिक्ष की रक्षा भी हो,
चला कारवां, ना कभी थमे।

विविध-विविधता लेकर भारत,
‘भीम-जनतंत्र’ से एक बना
विश्व-परिवेश भी एक बने तो,
कैसा हो ये नेक सपना ?

हथियार-होड़ की हठ से हटकर,
नई राह को चुनना है
जहां मानव खुशहाल भविष्य हो,
संसार को ऐसा बुनना है।

सहपृथ्वी, शताधिक बहनों ने,
प्यार अपना पहुँचाया है
चंदा मामा वो जग के बन गए,
भारत-प्रज्ञान सरमाया है।

सोलह-अरब आँखों के सपने,
भारत पर ही अब उम्मीद
राखी-चंदा पहुंच गई है,
सूर्य-सर्वोदय, अब होंगे दीद।

अमृत-महोत्सव, ‘स्वर्ण-चिड़िया’ का,
खुले अंतरिक्ष में मनाएंगे।
‘स्वाधीनता दिवस दो हजार सैंतालीस’
‘अजस्र’ सपने सजाएंगे॥

परिचय-हिन्दी-साहित्य के क्षेत्र में डी. कुमार ‘अजस्र’ के नाम से पहचाने जाने वाले दुर्गेश कुमार मेघवाल की जन्म तारीख १७ मई १९७७ तथा स्थान बूंदी (राजस्थान) है। आप सम्प्रति से राज. उच्च माध्य. विद्यालय (गुढ़ा नाथावतान, बून्दी) में हिंदी प्राध्यापक (व्याख्याता) के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। छोटी काशी के रूप में विश्वविख्यात बूंदी शहर में आवासित श्री मेघवाल स्नातक और स्नातकोत्तर तक शिक्षा लेने के बाद इसी को कार्यक्षेत्र बनाते हुए सामाजिक एवं साहित्यिक क्षेत्र विविध रुप में जागरूकता फैला रहे हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य और आलेख है, और इसके ज़रिए ही सामाजिक संचार माध्यम पर सक्रिय हैं। आपकी लेखनी को हिन्दी साहित्य साधना के निमित्त बाबू बालमुकुंद गुप्त हिंदी साहित्य सेवा सम्मान-२०१७, भाषा सारथी सम्मान-२०१८ सहित दिल्ली साहित्य रत्न सम्मान-२०१९, साहित्य रत्न अलंकरण-२०१९ और साधक सम्मान-२०२० आदि सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। हिंदीभाषा डॉटकॉम के साथ ही कई साहित्यिक मंचों द्वारा आयोजित स्पर्धाओं में भी प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार पा चुके हैं। ‘देश की आभा’ एकल काव्य संग्रह के साथ ही २० से अधिक सांझा काव्य संग्रहों में आपकी रचनाएँ सम्मिलित हैं। प्रादेशिक-स्तर के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में भी रचनाएं स्थान पा चुकी हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-हिन्दी साहित्य एवं नागरी लिपि की सेवा, मन की सन्तुष्टि, यश प्राप्ति और हो सके तो अर्थ की प्राप्ति भी है।