Visitors Views 16

सबला

अविनाश तिवारी ‘अवि’
अमोरा(छत्तीसगढ़)

************************************************************************

युगों-युगों से सहते आये नारी की व्यथा करुणा है,
अबला नहीं अब सबला है,ये दुर्गा लक्ष्मी वरुणा है।
द्रौपदी आज बीच सभा चीत्कार रही,
कितनी सारी निर्भया खून
के आँसू बहा रही।
चीरहरण अब रोज होता कृष्ण नहीं अब आते हैं,
छोटे-छोटे मासूम भी हवस की भेंट चढ़ जाते हैं।
अर्जुन बना बृहनलला देखो,भीष्म शैया पर सोते हैं,
विदुर चले अब शकुनि चाल,द्रोण गुरुत्व को खोते हैं।
सीता की अग्नि परीक्षा बीच चौराहे होती है,
कटी नाक शूर्पणखा को प्रतिदिन लम्बी होती है।
महिषासुर का मण्डन करते रामायण को भूल रहे,
बन्दूक उठा के आज युवा घर अपना ही फूंक रहे।
अब तो नारी सजग होकर शस्त्रों का संधान करो,
चंडी काली दुर्गा बनकर,नवयुगका निर्माण करो।
छद्म रखे निर्बलता के बंधन सारे तोड़ दो,
तूफानों से टकराने को नाव उधर ही मोड़ दो।
मंज़िल तेरी हिम्मत तेरा पथिक व्यर्थ क्यूँ थकता है,
वही सफल जिसको शमशान की,राख का चूरा लगता है।
निर्भय हो कूद पड़ो समर में,चामुंडा अवतार हो,
तोड़ो बन्धन छद्म हया का,देश की कर्णधार हो॥

थाम लो तलवार अब तुम रानी लक्ष्मीबाई हो,
सुनीता कल्पना गीता जैसी आज की तरुणाई हो।
तुम आज की तरुणाई हो…॥

परिचय-अविनाश तिवारी का उपनाम-अवि है। वर्तमान में छग राज्य के जिला सूरजपुर स्थित ग्राम प्रतापपुर में बसे हुए हैं,पर स्थाई पता अमोरा (महंत)है। इनका जन्म २९ मार्च १९७४ में जांजगीर में हुआ है। हिंदी, भोजपुरी,अवधी और छत्तीसगढ़ी भाषा के अनुभवी श्री तिवारी ने स्नातकोत्तर (वाणिज्य) तक शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र-नौकरी (शिक्षक-सरहरी)है।  सामाजिक गतिविधि में शिक्षा के प्रसार के लिए गैर सरकारी संगठन के जरिए कार्यक्रम करते हैं। आपकी लेखन विधा-दोहा, ग़ज़ल,सजल,मुक्तक और हाइकु है। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती हैं। अविनाश तिवारी ‘अवि’ की लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा का प्रसार और छत्तीसगढ़ी का सम्मान है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-दिनकर जी हैं। आपके लिए प्रेरणा पुंज-हरिओम पंवार हैं। आपकी ओर से सबके लिए सन्देश-“भाषा अपनी सुदृढ़ हो,भाषा से अभिमान,कर्म करें स्वदेश हित में,साहित्य का रख मान” है। आपकी विशेषज्ञता- समसामयिक कविता लिखने में है।