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दीपावली पर पूरा पारिवारिक मनोरंजन ‘लक्ष्मी’

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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निर्देशक राघव लारेंस की इस फिल्म ‘लक्ष्मी’ में अदाकार अक्षय कुमार,कियारा,शरद कपूर,अश्विनी कसलेकर,मुस्कान,आयशा रज़ा,राजेश शर्मा और मनु ऋषि हैं। संगीत तनिष्क बागची,अनूप कुमार, अमर मोहिले और साक्षी खुशी ने बनाया है।


फ़िल्म से पहले मुख्तसर चर्चा-
फ़िल्म के नाम ‘लक्ष्मी बम’ को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई कि लक्ष्मी देवी के रूप में पूज्यनीय होकर आस्था का विषय है। उनके नाम के साथ बम नाम जोड़ने से धार्मिक भावनाएं आहत हो रही है। तब अक्षय और निर्माताओं ने उनकी आपत्ति सुनी और नाम मे से बम हटाकर सिर्फ लक्ष्मी पर सहमति बनाई गई। एक विवाद और आया लव जिहाद की फ़िल्म में अक्षय नाम का,पर पर यह जैसे उठा,वैसे ही दफन हो भी गया।
कंचना का इतिहास-
पहली फ़िल्म तमिल ‘मुनि’ थी जो बाद में कंचना श्रंखला में बदल गई। इस फ़िल्म को ‘प्रतिशोध-द रिवेंज’ नाम से गोल्ड माइंस ने डब कर के प्रदर्शित किया था। मुनि के निर्देशक भी राघव ही थे, पटकथा-कहानी-निर्देशन राघव का ही था। बजट था ५ करोड़,कमाई थी १५ करोड़,फ़िल्म सुपरहिट साबित हुई।
राघव ने इसकी सीक्वल मुनि २ पर काम शुरू कर दिया था। ४ साल बाद मुनि २ प्रदर्शित हुई,जिसे नाम दिया गया ‘कंचना।’ बजट था लगभग ४ करोड़ ,कमाई ३० करोड़। ‘लक्ष्मी’ फ़िल्म ‘मुनि-२’ की री-मेक है। कन्नड़ भाषा में कल्पना,श्रीलंका में माया, म्यंमार में थरथर बिनी,बांग्लादेश में माया बिनी नाम से बनाया गया था,अब लक्ष्मी नाम से हिंदी संस्करण आ रहा है।
कहानी-
आसिफ (अक्षय कुमार) और रश्मि (कियारा आडवाणी) प्रेम विवाह कर चुके हैं। उनके पास आसिफ के मरहूम भाई-भाभी का बेटा भी रहता है। रश्मि अपने विवाह से नाराज घर वालों को मनाना चाहती है कि,वह आसिफ को कुबूल कर ले और खुश परिवार बन जाए। आसिफ और भतीजे को लेकर रश्मि अपनी मम्मी (आयशा टीजवी),पापा (महेश शर्मा),भाई (मनु रिषी),भाभी (अश्विनी) के घर पहुंचते हैं। इनके बंगले के पास एक खाली प्लॉट है,जिसे लोग भूतिया मानकर दूर ही रहते हैं। आसिफ बच्चों के साथ वहां खेलने पहुंच जाता है और शुरू होता है लक्ष्मी का भूतिया खेल। इस खेल को समझने और महसूस करने के लिए फ़िल्म देखना बनती है। लक्ष्मी क्यों भूत बनी घूम रही है और वह क्यों आसिफ के सहारे अपने किन दुश्मनों को अंजाम तक पहुंचाती है,इसके लिए फ़िल्म देखी जा सकती है। क्या आसिफ को एक हिन्दू परिवार अपनाता है,इस सवाल के जवाब के लिए भी फ़िल्म देखी जा सकती है।
अदाकारी-
अक्षय कुमार अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ अभीनय परोस गए हैं,कियारा को जितना काम मिला उसमें माकूल लगी है,राजेश शर्मा,आएशा रिजवी,अश्विनी, मनु ऋषि से उनकी अभिनय क्षमता के अनुरूप काम नहीं लिया गया है। शरद केलकर उत्कृष्टता की सीमा पार कर अभिनय कर गए हैं।
निर्देशन-
निर्देशन में राघव का यह लगभग चौथा संस्करण है,जिसमें औसत ही लगा है।
क्यों देखें-
अक्षय के शानदार अभिनय के लिए किन्नरों को लेकर एक सशक्त सामाजिक सन्देश है।
कमियां-
पटकथा में कसावट और हास्य की कमी लगी, पारिवारिक हास्य को और भी परिष्कृत किया जा सकता था,पटकथा भी साथ छोड़ती नज़र आ रही थी। सहयोगी उम्दा कलाकारों का सही प्रयोग नहीं किया गया है।
गीत-संगीत-
बेक ग्राउंड संगीत माकूल और बढ़िया है। कुल जमा ४ गाने हैं,जिसमें 2 गाने ठूँसे महसूस होते हैं। एक तांडव शानदार और कहानी को आगे बढ़ाता है जो लाजवाब बन गया है,उस पर अक्षय का नृत्य भी काबिले तारीफ रहा है।
*अंत में-
फ़िल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं हुई,यदि होती तो बड़ी शुरुआत लेती। डिजनी हॉट स्टार ने १२५ करोड़ में अधिकार खरीदे,सेटेलाइट और इंटरनेट अधिकार बिके ७५ करोड़ में,तो फ़िल्म २०० करोड़ तो प्रदर्शन के पूर्व ही कर चुकी है। इसे साढ़े ३ सितारे देना बेहतर है।

परिचय : इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंL आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंL १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैL आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंL