रुक्मणी पूछे सवाल
गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* रुक्मणी पूछ रही,कान्हा मेरा प्रेम क्यूँ अधूरा है, मैं अर्धांगनी तेरी,संग राधा को क्यूँ बिठाया है… कान्हा तुझ पर मैंने..तन-मन वारा है… मैं भक्ति तेरी करती,तुझको ही पूजा है… मैं तन हूँ तेरा,मन राधा को क्यूँ बसाया है… रुक्मणी पूछ रही,मेरा प्रेम…ll कान्हा तेरे चरणों की मैं हूँ … Read more