जीवन के उस पार
राजेश पड़िहार प्रतापगढ़(राजस्थान) *********************************************************** सिर्फ नैनों में थे सपने, धरातल पर होते नहीं, जो कभी साकार। अब, अपने कद से भी ऊंचा, हो गया है उनका आकार। ये उन दिनों की बात है, जब हाथों में होता था गुल्ली-डंडा। छोटी-सी डपट पर, गरम होता खून पापा के पदचाप की आहट सुन, हो जाता था ठंडा। … Read more