मजदूरों के नाम पर मजाक

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** परिभाषा मजदूर की,पूछ रहे हैं आप। ‘बबुआ’ इतना जानिए,जीवन का अभिशाप॥ दीन-हीन कुंठित पतित,भूखा फिर लाचार। बबुआ है मजदूर का,इतना-सा व्यापार॥ सभी सृजन के मूल में,छिपा हुआ मजदूर। बबुआ कैसे हो गया,फिर आँखों से दूर॥ आसमान चादर बना,धरती बन गई खाट। मजदूरों के बस यही,बबुआ देखे ठाठ॥ मजदूरों के नाम … Read more

रिश्ता

कृष्ण कुमार सैनी ‘राज’ दौसा(जयपुर ) *************************************************** पूज्य पिता जी की बाँहों में, जीने का किरदार छिपा हैll ममतामई माँ के ‘रिश्ते’ में, अमर प्रेम संसार छिपा हैll बहिना के राखी धागों में, पूजा पुण्य प्रणाम छिपा हैll नमन वंदना करके देखो, सच में चारों धाम छिपा हैll पिता-पुत्र के ‘रिश्ते’ में, साहस त्याग निदान … Read more

पृथ्वी पर बचे रहें उनके चिन्ह

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** जब देखती हूँ मैं उगते सूरज को, उनकी बेचैनी उनकी तड़प, उनकी जीने की चाहत और दीनता उनकी अंधेरे से लड़ाई, सबका सब मेरी नसों में उतरता जाता है…। करोड़ों-करोड़ों लोग जो नहीं देख पा रहे हैं सूरज, उनके लिए सूरज को अपनी हथेली पर उगाना चाहती हूँ…। … Read more

रुला तो न दोगे..

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** (रचनाशिल्प:फाऊलुन×४, १२२ १२२ १२२ १२२) कहीं तुम मुझे यूँ भुला तो न दोगे। कि सपने सुहाने जला तो न दोगे॥ कयामत की रातें जुदाई की बातें, अगर दिल मिले तो रुला तो न दोगे। हजारों में तू एक दिल में बसी हो, सितमगर ये दामन उड़ा तो न … Read more

एकाधिकार से ही हिंदी का राष्ट्रभाषा बनना और जनसंख्या नियंत्रण संभव

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** नयी शिक्षा नीति ने यह स्पष्ट कह दिया है कि हम हिंदी नहीं थोपेंगे किसी भी प्रान्त या भाषा पर। यह बहुत सही निर्णय है,जिस प्रकार हमारे यहाँ जनसंख्या नियंत्रण करना असंभव है। जी हाँ,भारत एक लोक कल्याणकारी राष्ट्र है,जो लोगों के लिए,लोगों के द्वारा,लोगों को चुनकर भेजता है और चुने … Read more

पत्ते की व्यथा

दुर्गेश राव ‘विहंगम’  इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************** तरु से गिरा पत्ता तल में आ गिरा तरु के, समीर के संग, उड़ता चला जाए नहीं चलती कोई सत्ता, राह में धूल से लपेटे हुए राहगीरों के पैरों तले दबता, कभी काँटों में अटकना तो कभी गड्ढों में सड़ना, दिनकर की रोशनी से जल उठता सुख कर चूर-चूर हो … Read more

अथ स्वरुचिभोज प्लेट व्यथा

नरेंद्र श्रीवास्तव गाडरवारा( मध्यप्रदेश) ***************************************************************** सलाद, दही बड़े, रसगुल्ले, जलेबी, पकौड़े, रायता, मटर पनीर, दाल, चावल, रोटी, पूरी के बाद… ज्यों ही मैंने प्लेट में पापड़ रखा, प्लेट से रहा न गया और बोली- अब बस भी करो, थोड़ा सुस्ता लो पहले इतना तो खा लो। घर में तो, एक गिलास पानी के लिये पत्नी … Read more

शुभ जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ

हिन्दीभाषा.कॉम मंच के रचनाकार साथी डॉ.सोनाली नरगुंदे जी का ३० जून को शुभ जन्मदिन है..इस पटल के माध्यम से आप उनको शुभकामनाएं दे सकते हैं…..

माँ,जहाँ में मैं भी आना चाहती हूँ

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** भैया के ही जैसे हर पल खिलखिलाना चाहती हूँ, माँ नहीं मारो,जहाँ में मैं भी आना चाहती हूँ। है यही बस लालसा देखूँ ज़माने को जरा मैं, कुदरती रंगीनियाँ दिलकश खजाने को जरा मैं। तुम भले ही मुख नहीं यह देखना हो चाहती पर, चाहती देखूँ तुम्हारे मुस्कुराने को … Read more

बेटी की गरिमा

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** बेटी आन-बान-शान है, बेटी से विश्व महान है। वात्सल्य रस में भी बेटी, माता-पिता का रखती ख्याल नन्हें-नन्हें हाथों से, पिता को पानी देती नन्हें-नन्हें हाथों से, माता का आँगन सखेरती। किशोर अवस्था है बड़ी निराली, विद्यालय है जाने की तैयारी रसोई में माँ का साया बन, दुख-दर्द सब बाँट लेती … Read more