अधिवेशन-संगोष्ठी से हिंदी को बढ़ावा देने की जरूरत

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** हर जगह हर समय स्थानीय-राज्य स्तरीय-राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिवेशन-संगोष्ठी-गोष्ठी होती रहती है और स्वाभाविक हैं उनमे भाग लेने वाले उस स्तर के विद्वान-लेखक-चिंतक भाग लेते हैं और उनकी योग्यता के आधार पर ही कार्यक्रम की गरिमा बनती हैl यह जरुरी है कि इनमें बहुत अच्छी जानकारियां उपलब्ध होती है … Read more

क्या कहें…

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ पल-पल तरसते थे, उस पल के लिए। वो पल ही रुका, कुछ पल के लिए। सोचा था उसे जिंदगी का, हसीन सपना बना लेंगे। पर क्या करें वो पल ही, रुका कुछ पल के लिएll प्यार तो हर कोई करता है, क्या प्यार को कोई समझता है। तीन अक्षर का शब्द … Read more

प्यार फिर से

ललित प्रताप सिंह बसंतपुर (उत्तरप्रदेश) ************************************************ बेवजह मुझे तुम सताने लगी होl क्या प्यार फिर से जताने लगी हो ? अदायें तो लगती है ऐसी ही कुछ, जो जुल्फें फिर लहराने लगी होl हरदम हरपल याद आती हो तुम, अब ऐसे दिल पर छाने लगी होl जिन्दगी में खाये हैं धोखे बहुत, अब मजाक तुम … Read more

दरकते रिश्ते

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** रिश्ते नाजुक डोर हैं,रखना इसे सम्हाल। कहीं टूट जाये नहीं,होना नहीं बेहाल॥ रिश्ते मुश्किल से जुड़े,बन्धन है अनमोल। इसे निभाना साथियों,स्वागत कर दिल खोल॥ बिकते रिश्ते हैं नहीं,यह तो है अहसास। दिल कॆ नाजुक तार हैं,होते हरदम पास॥ कभी छोड़ जाना नहीं,बीच डगर में साथ। कदम मिलाकर ही … Read more

आओ हम सौगंध उठाएं

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** आओ हम सौगंध उठाएं, देश को निर्मल स्वच्छ बनाएं। सारे पर्यावरण को शुद्ध बनाएं, घर के कचरे के लिए कूड़ादान बनाएं। आओ हम सौगंध… जब भी हम बाजार को जाएं, साथ में अपना झोला ले जाएं। प्लास्टिक पोलीथिन से मुक्ति पाएं, भारत को पोलीथिन मुक्त बनाएं। आओ हम सौगंध… देश नदियाँ … Read more

जागी है विभा..

हेमा श्रीवास्तव ‘हेमाश्री’ प्रयाग(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************* आँखें जगी है, रात सोई-सोई-सी बातें छिड़ी हैं। आँगन बीच, ये स्वप्निल नयन ये नभ झील। है मंद-मंद, चल रही पवन पलकें बंद। गुजर रही, पहर पे पहर रात सहमी। कुतर रहा, कोई चाँद धीरे से वो घट रहा। बोझिल कंठ, सूखे मुख अधर मादक गंध। औंधी पड़ी है, वो … Read more

स्वागत करूँ सतरंगी अरुणाभ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** अभिनंदन स्वागत करूँ,सतरंगी अरुणाभ। नव उमंग नव लक्ष्य पथ,द्रुत नवगति नीलाभll नवप्रभात दर्शन सुलभ,नया सृजन नवनीत। नव उमंग नवरंग से,परहित कर नवप्रीतll अनुरागी हम हैं वतन,धर्म रीति अरु नीति। हैं सहिष्णु समरस सुलभ,गाएँ भारत गीतिll खग मृग सह पादप लता,हूँ निकुंज सुखधाम। मातु प्रकृति नवरस सहज,कँटिल पुष्प अभिरामll … Read more

सलामत रहे ये आँचल

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** आँचल एक मखमली अहसास, बालक हेतु जागीर दुनिया की। माँ का आँचल मिले, तो गम उसके पास नहीं फटकते और मुस्कुरा उठता है बालक, माँ के आँचल तले। प्रेमिका के आँचल पर तो, कई प्रेमियों ने गीत लिख डाले दे डाली सलाह उड़ते आँचल को संभालने की। नायिका भी … Read more

तू दोस्त हमारा पुराना है…

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** तू दोस्त हमारा तो सबसे ही पुराना है, तेरे दिल में रहता हूँ,एक ही ठिकाना है। मुझसे न खफा हो मेरे दोस्त मेरे हमदम, रूठा यदि मैं तुझसे,तुझे ही मनाना है। आनन्द तुम्हारा हो या दोस्त मुझे मिले, रूठे फिर तो रूठे,ऐसा ही जमाना है। नाराज होकर कह देता है,मुझे … Read more

पेड़

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ******************************************************************************   सिसकी भरकर रो रहे,                   अरे बचा लो पेड़।    यौवन में ही हो रहे,                   आज युवान अधेड़ll      साँसों का टोटा हुआ,                 … Read more