जल ही जीवन

डॉ.मधु आंधीवालअलीगढ़(उत्तर प्रदेश)************************************************ ज से जल जीवन स्पर्धा विशेष… जल शब्द ही अपने-आपमें अनमोल है। ‘जल नहीं तो कल नहीं’,’जल से संवारे कल’ इतने नारे हम सुनते हैं,पर क्या हम जल को सहेजने का प्रयास करते हैं। गर्मी आते ही दुनिया में पेयजल का संकट सामने आता है।आज मनुष्य को लगता है कि,जल की आवश्यकता … Read more

भूमिगत जल का संरक्षण आवश्यक

डॉ.पूर्णिमा मंडलोईइंदौर(मध्यप्रदेश) *************************************** ज से जल जीवन स्पर्धा विशेष… मनुष्य अपने जीवन-यापन के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहता है,जिसमें जल,वायु,मृदा,वन,जैव विविधता,खनिज,जीवाश्म ईंधन इत्यादिशामिल है।इनमें से जल एकमात्र ऐसा प्राकृतिक संसाधन है,जो प्रत्येक जीव,पौधे एवं जंतुओं को एक समान आवश्यकता होती है। अतः,पानी की खपत बहुत अधिक है। जल का संरक्षण जीवन का संरक्षण है,क्योंकि … Read more

दया

रोहित मिश्र,प्रयागराज(उत्तरप्रदेश)*********************************** रमेश रोज की तरह आज भी अपने विद्यालय से पैदल ही आ रहा था। तभी उसकी नजर सड़क किनारे चोटिल कुत्ते के बच्चे पर चली गई। वह समझ गया कि किसी वाहन की चपेट में वह बच्चा आ गया था। बच्चा दर्द से कराह रहा था। छोटे से बच्चे का दर्द उससे देखा … Read more

जल से ही जीवन चले

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ************************************** ज से जल जीवन स्पर्धा विशेष… ‘जल से ही जीवन चले,जल से यह संसार।जल से ही यह सृष्टि है,जल है प्राणाधार॥’ हम नित ही सुनते आए हैं कि ‘जल ही जीवन है।’ जल के बिना सुनहरे कल की कल्पना भी नहीं की जा सकती। वस्तुत: जीवन के सभी कार्यों का … Read more

जल है तो कल है

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** ज से जल जीवन स्पर्धा विशेष… शरीर हो या प्रकृति सभी पांच तत्व से बने हैं और वे हैं-जल,वायु,पृथ्वी,अग्नि और आकाश। इन पाँचों में संतुलन बना रहना अति आवश्यक है,तभी हम पर्यावरण को सब तरह से अपने अनुकूल पाएंगे, लेकिन आजकल भिन्न-भिन्न कारणों से इसकी मात्रा में असंतुलन भी होता है … Read more

जागरूकता की जरूरत

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ज से जल जीवन स्पर्धा विशेष… जल ही जीवन है,ये तो पूरा संसार जानता है,पर क्या हम अपने पीने के जल स्त्रोतों को संभाले हुए हैं ? जी नहीं,बिल्कुल भी नहीं,दुनिया में तीन हिस्से पानी है और एक हिस्सा ज़मीन का है। पानी की ज़रूरत जीवन के लिए,पेड़-पौधों के लिए, वनस्पतियों को सुरक्षित … Read more

भारत-रूसःहमें हुआ क्या,भूमिका अदा करें ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* रूसी विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर के बीच हुई बातचीत के जो अंश प्रकाशित हुए हैं,और उन दोनों ने अपनी पत्रकार-परिषद में जो कुछ कहा है,अगर उसकी गहराई में उतरें तो थोड़ा-बहुत आनंद जरुर होगा लेकिन दुखी हुए बिना भी नहीं रहेंगे। आनंद इस बात से होगा कि … Read more

मन को कर तू शक्तिमय

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************************* ‘मन को कर तू शक्तिमय,ले हर मुश्किल जीत।काँटों पर गाना सदा,तू फूलों के गीत।’मनुष्य का जीवन चक्र अनेक प्रकार की विविधताओं से भरा होता है,जिसमें सुख-दु:ख, आशा-निराशा तथा जय-पराजय के अनेक रंग समाहित होते हैं। वास्तविक रूप में मनुष्य की हार और जीत उसके मन की मज़बूती पर आधारित होती … Read more

कवियों के कवि जनकवि ‘नागार्जुन’

डॉ. दयानंद तिवारीमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ जनकवि नागार्जुन का असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था,परंतु हिन्दी साहित्य में उन्होंने ‘नागार्जुन’ तथा मैथिली में ‘यात्री’ उपनाम से रचनाएँ कीं। काशी में रहते हुए उन्होंने ‘वैदेह’ उपनाम से भी कुछ कविता लिखी थीं। सन् १९३६ में सिंहल में ‘विद्यालंकार परिवेण’ में उन्होंने ‘नागार्जुन’ नाम ग्रहण किया। आरंभ में उनकी हिन्दी … Read more

बंगाल:मर्यादा क़ा ध्यान नहीं रखा

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* प. बंगाल के नंदीग्राम में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। जो शुभेंदु कल तक ममता के सिपहसालार थे,वे आज भाजपा के महारथी हैं। ऐसा बंगाल के कई चुनाव-क्षेत्रों में हो रहा है। ममता की तृणमूल कांग्रेस से इतने नेता अपना दल बदलकर भाजपा में शामिल हो … Read more