‘धूमिल’ का काव्य संसार-भाषा और शिल्प की नई जमीन

डॉ. दयानंद तिवारीमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ धूमिल ने समाज में स्थित बेकारी,दारिद्र्यता, सामाजिक अनिष्ट रूढ़ियाँ,नारी विषयक दृष्टिकोण, दलितों की स्थिति अनेक समस्याओं से ग्रस्त ग्रामीण जीवन आदि अनेक समस्याओं को अपने काव्य का विषय बनाया और इसमें परिवर्तन लाने के लिए समाज जागृति करने का प्रयास अपनी कविताओं के माध्यम से किया है। धूमिल की कविताओं में … Read more

स्वभाषा के बिना महाशक्ति कैसे बनेगा देश ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* मातृभाषा दिवस विशेष-भाग 3 आम तौर पर लोगों को पता नहीं होता कि संयुक्त राष्ट्र २१ फरवरी को ‘विश्व-मातृभाषा दिवस’ क्यों मनाता है। दुनिया के लगभग सभी राष्ट्रों में इस दिन मातृभाषाओं के सम्मान से जुड़े आयोजन होते हैं,लेकिन इसका श्रेय हमारे पड़ोसी राष्ट्र बांग्लादेश को जाता है। बांग्लादेश १९७१ के पहले … Read more

आखिर हिंदी को ‘गौरव’ कब ?

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस स्पर्धा विशेष…. भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात जी.एस. अंयगर व के.एम. मुंशी की अनुशंसा पर १४सितंबर १९४९ को हिंदी को संघ सरकार की भाषा के रूप मे प्रतिष्ठित कर ‘राजभाषा’ के रूप मे मान्यता दी गई,तभी से प्रति वर्ष १४ सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ तथा सितंबर महीने को … Read more

फ्रांसीसी इस्लाम ने मचाया हड़कम्प

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* फ्रांस की संसद ने ऐसा कानून पारित कर दिया है, जिसे लेकर इस्लामी जगत में खलबली मच गई है। कई मुस्लिम राष्ट्रों के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री तथा मुल्ला-मौलवी उसके खिलाफ अभियान चलाने लगे हैं। उन्होंने फ्रांस के विरुद्ध तरह-तरह के प्रतिबंधों की घोषणा कर दी है। सबसे पहले यह जानें कि यह कानून क्या … Read more

जीवन की सफलता का आधार सकारात्मकता ही

अश्विनी प्रशांत रायकरनवी मुंबई(महाराष्ट्र)********************************* मनुष्य ने अपने ज्ञान के बलबूते पर आत्मविश्वास,दृढ़ संकल्प, दृढ़ता और कड़ी मेहनत से आसमान की बुलंदियों पर अपना नाम लिख दिया है और चाँद की जमीन पर अपना मुकाम हासिल कर लिया है।आत्मविश्वास एवं कड़ी मेहनत सहित इन सारे गुणों को सकारात्मक विचारों से निखारा और सँवारा जाए तो सफलता … Read more

शिक्षक बिन विद्यालय यानि बैल से दूध निकालना

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** मध्यप्रदेश सरकार का यह मत है कि,आजकल छात्र-छात्राएं अभिमन्यु जैसे गर्भ से ही शिक्षित पैदा होती हैं और मोबाइल-लेपटॉप युग के कारण अब शिक्षा की कोई जरुरत नहीं है,इसलिए शिक्षकों के बिना अध्ययन-अध्यापन किया जा सकता है। इसीलिए रिक्त स्थानों को भरने की जरुरत भी नहीं है। इससे कई फायदे हैं,जैसे बिना पढ़े-लिखे … Read more

सरकारी सेवाओं से मातृभाषाओं की बिदाई

डॉ. अमरनाथ,कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)****************************** मातृभाषा दिवस विशेष-भाग २…. यूपी बोर्ड की परीक्षा में ८ लाख विद्यार्थियों का हिन्दी में अनुत्तीर्ण होने का समाचार २०२० में सुर्खियों में था। कुछ दिन बाद जब यूपीपीएससी का परिणाम आया तो उसमें भी दो तिहाई से अधिक अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थी सफल हुए। यह संख्या पहले २०-२५ प्रतिशत के … Read more

भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के अथक सेनानी बलदेव बंशी

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)****************************************** हिन्दी योद्धा……… भारतीय भाषाओं को उनका हक दिलाने के लिए १९८० के दशक में संघ लोक सेवा आयोग के द्वार पर वर्षों तक चलाए गए धरने के अध्यक्ष रहे बलदेव बंशी अपने संघर्ष के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। इसी संगठन से जुड़े पुष्पेन्द्र चौहान को भला कैसे भुलाया जा सकता … Read more

रूस-पाकःभारत हाशिए में

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* भारत के विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला मास्को होकर आए हैं। कोविड के इस भयंकर माहौल में हमारे रक्षा मंत्री,विदेश मंत्री और विदेश सचिव को बार-बार रूस जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है ? ऐसे कई मुद्दे हैं,जिनकी वजह से दोनों मित्र-राष्ट्रों के बीच सतत संवाद जरूरी हो गया है। सबसे पहला … Read more

मातृभाषा के बिना व्यक्ति-राष्ट्र का समुचित विकास संभव नहीं…

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** मातृभाषा दिवस विशेष-भाग १ विश्व में संभवत: कोई ऐसा वैज्ञानिक, शिक्षाविद,दार्शनिक,चिंतक अथवा भाषाविद् नहीं होगा जिसने मनुष्य के विकास के लिए मातृभाषा के महत्व को स्वीकार न किया हो। भाषाविदों के अनुसार समाज विकसित या अविकसित हो सकते हैं लेकिन कोई भी भाषा अविकसित नहीं होती। संसार की हर भाषा में … Read more