जैन धर्म की महती राष्ट्रीय भूमिका

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** चिंतन…….. प्रस्तुत संस्कृति की धारा ने भारतीय जीवन व विचार एवं व्यवस्थाओं को कब कैसे पुष्ट और परिष्कृत किया,इसका यथार्थ मूल्यांकन होकर उसकी वास्तविक रूपरेखा उपस्थित हो जाए तो मालूम होगा कि जैन धर्म अपनी विचार व जीवन संबंधी व्यवस्थाओं के विकास में कभी किसी संकुचित दृष्टि का शिकार नहीं बना। उसकी भूमिका … Read more

असफलता से सफलता का मार्ग प्रशस्त कीजिए

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ************************************* असफलता जीवन की एक वास्तविकता है,जिसका सामना सभी मनुष्यों को अपने जीवन में कभी न कभी,किसी न किसी रूप में करना ही पड़ता है। इससे कोई भाग नहीं सकता।अलबर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि,-‘यदि कोई व्यक्ति कभी असफल नहीं हुआ,इसका मतलब उसने अपने जीवन में कभी कुछ नया करने की … Read more

दुर्भाग्यपूर्ण और सरकारी तंत्र की असंवेदनशीलता

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** शहादत न सही,कोरोना योद्‍धाओं की मौत जिन्हें देश ने ‘कोरोना योद्धा’ कहा,जिनके सम्मान में प्रधानमं‍त्री नरेन्द्र मोदी ने ताली-थाली बजाने का आव्हान किया, जिन्होंने कोविड-१९ महामारी से लड़ते हुए जान लगा दी,और उसी क्रूर कोरोना का शिकार बने चिकित्सकों की शहादत को लेकर मोदी सरकार और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बीच जिस … Read more

संयम और संकल्प आवश्यक

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ********************************************** संयम और संकल्प जीवन में आवश्यक होने ही चाहिए,क्योंकि जीवन को जीने के अधिकारों को प्राप्त करने के लिए प्रायः संकल्प के साथ-साथ संयम की अत्यंत आवश्यकता पड़ती है।इनकी आवश्यकता उस समय और भी अधिक बढ़ जाती है,जब साधारण व्यक्ति से लेकर असाधारण योद्धा तक विपरीत परिस्थितियों में … Read more

किस राष्ट्रचेतना की बात करते हैं हम ?

श्रीमती लीना मेहंदलेगोवा**************************** राष्ट्रचेतना का उदय राष्ट्र के चिंतन से होता है! राष्ट्र चिंतन होता है राष्ट्र के दर्शन या तत्वज्ञान से,लेकिन भारत के विद्वान शिक्षाविद पंडित लोग यह सोचते हैं कि भारत देश के पास अपना कहने लायक कोई तत्वदर्शन नहीं है! जिसे बात पर विश्वास ना हो,वह संघ लोक सेवा आयोग से पूछे। … Read more

सत्यान्वेषी ध्यानप्रेमी स्वामी जी

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************* स्वामी विवेकानन्द जी जैसे निराले व्यक्तित्व को प्रणाम एवं श्रद्धाजंली अर्पण। स्वामी जी के जीवनादर्श एवं चरित्र पर विभिन्न तथ्यादि से पता लगता है कि,गम्भीर ध्यान से ही समझदार मन तैयार होता है। अटल,शुद्ध,स्वाधीन विचार युक्त मन के अधिकारी स्वामीजी तो जन्मजात ‘ध्यानप्रेमी’ थे। उनके जीवन की कहानी को विश्लेषण करने … Read more

मन जीतने में कामयाब हुई सरकार

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** अंकीय भारत (डिजिटल) के पहले अंकीय बजट में जो भी घोषणाएं हुई हैं,उसके चलते शेयर बाजार में बम-बम, सेंसेक्स-निफ्टी में पहले कभी बजट के दिन इतनी महा तेजी नहीं दिखी। आम जनता को इस बजट में पसन्द आने वाले प्रावधान ज्यादा और निराश करने वाले बहुत कम हैं।अब चर्चा कर लेते … Read more

मातृभाषाओं को रोज़गार से जोड़ने वाले पहले वैज्ञानिक

डॉ. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)************************************* हिन्दी योद्धा:दौलत सिंह कोठारी(४ फरवरी पुण्यतिथि विशेष)… आजादी के बाद जब १९५० में संघ लोक सेवा आयोग की पहली बार परीक्षा हुई तो उसमें ३६४७ अभ्यर्थी शामिल हुए थे,जिनमें से २४० उत्तीर्ण हुए। १९७० में ११७१० बैठे थे और १९७९ में यह संख्या बढ़कर १ लाख से ऊपर हो गई। इस … Read more

वे धन्यवाद नहीं ले रहे…

धर्मपाल महेंद्र जैनटोरंटो (कनाडा)**************************** मैं अपने समय के प्रतिष्ठित होते-होते बच गए व्यंग्यकार के साथ बैठा हूँ। उनका जेनेरिक नाम व्यंका है,ब्रांड नेम बाज़ार में आया नहीं, इसलिए अभी उनका नाम बताने में दम नहीं है। यह चर्चा मोबाइल पर रिकॉर्ड हो रही है। प्र.: व्यंका जी,कभी आपका नाम हो जाए और आप अमर हो … Read more

मातृभाषा और बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा में भारतीय भाषाओं का महत्व

राहुल देवदिल्ली**************************** राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२०….. किसी व्यक्ति के जीवन में उसकी मातृभाषा के महत्व की सबसे अच्छी और सटीक तुलना करने के लिए माँ के दूध से बेहतर कुछ नहीं। जैसे जन्म के एक या दो वर्ष तक बच्चे के शारीरिक और भावनात्मक विकास के लिए माँ का दूध और स्पर्श सर्वश्रेष्ठ होते हैं,वैसे … Read more