हिन्दी और बोलियों के मधुर संबंध तोड़ने की नापाक कोशिशें
प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामीदिल्ली *********************************************************** हिन्दी को बांटने का जो कुप्रयास हो रहा है,उसमें अँग्रेज़ीदाँ लोगों का तो सामना करना पड़ ही रहा है,लेकिन विडंबना यह है कि हिन्दी को तोड़ने वाले अपने ही लोग कम नहीं हैं जो अपने निहित स्वार्थ के लिए अंग्रेज़ी वालों से कम भूमिका नहीं निभा रहे। वे हिन्दी और … Read more