अवसरवाद पर घातक प्रहार का अचूक आयुध आका बदल रहे हैं

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय *************************************************************** वैश्विक संस्कृतियों के घालमेल ने उपभोक्तावाद के चंगुल में मानवतावाद को तड़पने के लिए सौंप दिया है। अवसरवाद को कौशल के रूप में परिभाषित किया जाने लगा है। मानव और पशुओं में फर्क मात्र शारीरिक संरचना में रह गया है। ऐसे में लेखनी द्वारा विद्रोह होना स्वाभाविक और आवश्यक भी … Read more

हिरण पर क्यों लादें घास ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************** आंध्र प्रदेश की सरकार ने पिछले साल अपने सारे विद्यालयों में पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी कर देने का फैसला किया और विधानसभा ने उस पर मुहर लगा दी। भाजपा ने इसका विरोध किया और उसके २ नेताओं ने उच्च न्यायालय में याचिका लगा दी। उच्च न्या. ने इस अंग्रेजी को थोपने के … Read more

पितृ पक्ष:भरपूर आशीर्वाद प्राप्ति

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************** इस वर्ष २ से १७ सितम्बर तक पूरे १६ दिनों का पितृ पक्ष है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए,पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने एवं पितृ दोष निवारण के लिए ये दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पूरे साल की अमावस्या तथा इन दिनों पितृ तर्पण,पिंड दान,ब्राह्मण भोजन,दान,कुआं-तालाब का निर्माण,पौधरोपण,नारायण बलि-नाग … Read more

भारत के आर्थिक मामलों में अग्रणी रहे प्रणव मुखर्जी

संदीप सृजनउज्जैन (मध्यप्रदेश) ****************************************************** समन्वय और समरसता की मिसाल रहे भारत के १३वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अपने जीवन के ८४ वर्ष पूरे कर अनन्त की यात्रा पर निकल गए। २१०२ से २०१८ तक इस पद पर रहे प्रणब दा भारत के राष्ट्रपति बनने से पहले भारत सरकार के वित्त मंत्री भी रहे। भारत के आर्थिक मामलों,संसदीय … Read more

मादक पदार्थ और ‘सोम’ में कोई एकरूपता नहीं

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)******************************************************** आज के सनसनीखेज समाचारों में ड्रग्स (नशीले-मादक पदार्थ)का नाम अवतरित हो जाता है। मादक पदार्थ का सेवन समाज के पैसे वाले लोगों में करने की बात सुनी जाती है। वर्तमान समय में मादक पदार्थ ने अपना नाम समाज को खूब बाँटा है। जिसके लिए मादक पदार्थ आकाश-कुसुम की तरह … Read more

समाज को सकारात्मक परिवर्तन हेतु प्रेरित करेगी धनुष उठाओ हे अवधेश

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय *************************************************************** संत कबीर की उक्ति दु:ख में सुमिरन सब करै…” आज भी प्रयोजन युक्त है। दुखिया है कौन! कबीर बाबा बताते हैं कि,…दुखिया दास कबीर है…।अर्थात् जो समाज के बारे में सोचेगा,वह सामाजिक अवमूल्यन देखकर दुखी अवश्य होगा और एक सामाजिक प्राणी के नाते मनुष्य होने की यह निर्विवाद शर्त भी … Read more

मीडिया में रिया चालीसा का ही जाप क्यों ?

ललित गर्गदिल्ली ******************************************************* भारत में एक नई आर्थिक सभ्यता और एक नई जीवन संस्कृति करवट ले रही है,तब उसके निर्माण में प्रभावी एवं सशक्त भूमिका के लिए जिम्मेदार दोनों मीडिया शायद दिशाहीन है। १३० करोड़ की आबादी का यह देश कोरोना एवं अन्य जटिल समस्याओं से जूझ रहा है,इन समस्याओं एवं अन्य समस्याओं से लड़ते … Read more

कांग्रेस के ‘राजनीतिक कोरोना’ का टीका संभव ?

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  **************************************************************** कोविड-१९ विषाणु का टीका(वैक्सीन)तो देर-सबेर बन ही जाएगा,लेकिन देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के आंतरिक कोरोना विषाणु का कोई टीका शायद ही बन पाए। और बन भी गया तो कारगर शायद ही हो पाए। यह बात इसलिए उठी कि,कल तक कांग्रेस और राहुल को कोसने वाली शिवसेना ने कांग्रेस में ताजा … Read more

जातिय नहीं,शैक्षणिक आरक्षण दें

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************************** सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर जातिय आरक्षण के औचित्य पर प्रश्न-चिन्ह लगा दिया है। ५ जजों की इस पीठ ने अपनी ही अदालत द्वारा २००४ में दिए गए उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है,जिसमें कहा गया था कि आरक्षण के अंदर (किसी खास समूह को) आरक्षण देना अनुचित है … Read more

शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्र को भाषा की दरकार

प्रो. गिरीश्वर मिश्रदिल्ली************************************************************* कुछ बातें प्रकट होने पर भी हमारे ध्यान में नहीं आतीं,और हम हम उनकी उपेक्षा करते जाते हैं और एक समय आता है जब मन मसोस कर रह जीते हैं कि,काश! पहले सोचा होताl भाषा के साथ ही ऐसा ही कुछ होता हैl भाषा में दैनंदिन संस्कृति का स्पंदन और प्रवाह होता … Read more