‍हरियाली की कीमत पर जनसेवकों को नए घर क्यों ?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** एक तरफ दुनियाभर के वैज्ञानिक पर्यावरण बचाने के लिए अपीलें कर रहे हैं,खुद भोपाल जैसे शहर की हवा प्रदूषित होती जा रही है,वहीं मध्यप्रदेश की इस राजधानी में मौजूदा हरियाली को भी पलीता लगाया जा रहा है। यूँ भोपाल एक विकासशील शहर है,लेकिन लगता है कि यहां तमाम विकास हरियाली की … Read more

महिला शिक्षा के खास हिमायती थे अब्दुल मौलाना कलाम आज़ाद

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** ११ नवम्बर राष्ट्रीय शिक्षा दिवस विशेष……. राष्ट्रीय शिक्षा दिवस प्रत्येक वर्ष ११ नवम्बर को मनाया जाता है। यह दिवस भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी,प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री और ‘भारत रत्न’ से सम्मानित मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद की स्मृति में मनाया जाता है। भारत में शिक्षा के … Read more

हम सबके मर्यादा पुरुषोत्तम राम

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** राम सत्य है,मर्यादा है,कर्म है,आदर्श है,अनुकरणीय,हर मन में विराजते और जगत के पालनहार हम सबके मर्यादा पुरुषोत्तम राम हैं। जानें, र का अर्थ है अग्नि,प्रकाश,तेज,प्रेम,गीत। रम (भ्वा आ रमते) राम (कर्त्री धन ण) सुहावना,आनंदप्रद,हर्षदायक,प्रिय,सुंदर,मनोहर। राम शब्द इतना व्यापक है कि साहित्य में परमात्मा के लिए इसके समकक्ष एक शब्द ही आता … Read more

‘हिंदी’ है देश-प्रेम की भाषा

शंकर शरण  ************************************************************************ यह बात बार-बार साबित हो रही है कि जिन भारतीयों को पूरे देश से जुड़ाव-लगाव है वे तो हिंदी का महत्व समझते हैं,लेकिन जो राष्ट्रीय एकता के प्रति लापरवाह हैं,प्राय: वही हिंदी पर हीला-हवाला करते हैं। हमारे जो बुद्धिजीवी माओवादियों,अलगाववादियों, जिहादियों आदि से सहानुभूति रखते हैं,वे हिंदी का विरोध भी करते हैं। … Read more

लोकतंत्र `लोक-सुख` या `लोक-दुःख` का ?

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* देश के सामने हर दिन नयी-नयी समस्याएं खड़ी हो रही हैं,जो समस्याएं पहले से हैं,उनके समाधान की तरफ एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं,बल्कि दूर होते जा रहे हैं। रोज नई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं,कर रहे हैं। तब ऐसा लगता है कि पुरानी समस्याएं पृष्ठभूमि में चली गईं,पर … Read more

तुलसी देवे नमः नमः

गोपाल चन्द्र मुखर्जी बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************************ “यत्र नार्य्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:” (मनुसंहिता) नारी ही आदि शक्ति,आधार स्वरूपा महाशक्ति,महालक्ष्मी, महासरस्वती। सृष्टि स्थिति विनाशानां शक्तिभुते सनातनी! सुधामृत सिंचित करते हुए सृष्टि तथा संतान पालनकर्ती। नारी ही जगत प्रसूता,जननी। आदि अंत काल से संसार का आपातकाल में विश्व त्रिभुवन को रक्षाकर्ती एकमात्र आदिशक्ति महामाया ही नारी!” अत्याश्चर्य … Read more

देश बचाना हमारा भी कर्तव्य

ममता बनर्जी मंजरी दुर्गापुर(पश्चिम बंगाल) ****************************************************************************** सम सामयिक मुद्दा-प्रदूषण और पर्यावरण……… हेमंत ऋतु के आगमन के साथ ही त्योहारों का सैलाब आ पड़ाl धनतेरस,काली पूजा,दीपावली,गोवर्धन पूजा,चित्रगुप्त पूजा,भाईदूज और छठपूजा हो गई। धनतेरस के अवसर पर सोने-चाँदी के आभूषणों और बर्तनों की खरीद-बिक्री होती है। कालीपूजा में शक्ति रूपिणी माँ की पूजा होती है,तो दीपावली में लक्ष्मी-गणेश … Read more

किसी सूरज `बेटे` की ही हो सकती है ऐसी पूनम `माँ….

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** यह वास्तव में कलेजा चीर देने वाला मार्मिक प्रसंग है। इसे श्रद्धांजलि कहना,उसकी हृदय विदारकता को कम करना है। जिसने भी फैलता हुआ वह वीडियो देखा,सन्न रह गया,क्योंकि एक माँ ही अपने कलेजे के टुकड़े के लिए ऐसा कर सकती है। दुखों के पहाड़ को सात सुरों की सरगम में समेटने … Read more

जनतंत्र में जनभाषा ही होनी चाहिए न्याय की भाषा

जम्मू-कश्मीर राज्य का उर्दू भाषा से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं रहा। उर्दू का उदय दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में ही हुआ था। कश्मीर में तो इस्लामिक शासन भी नहीं था,वहाँ तो हिंदू राजा हरि सिंह का शासन रहा, लेकिन स्वतंत्रता के पश्चात इस्लामिक कट्टरता और प्रभाव के कारण कश्मीरियत की बात करनेवाले … Read more

कभी तुम आओगी…

कुँवर बेचैन सदाबहार प्रतापगढ़ (राजस्थान) ********************************************************************** ‘हमको फरक नहीं पड़ता’ या ‘हमें क्या अधिकार है!’,ये पंक्ति हम दोनों के बीच बोली जानी वाली सबसे झूठी बात थी। पता नहीं क्यों,मग़र मुझे लगता है कि जब आपसे ऐसा कोई बोलता है तो सबसे ज्यादा फर्क उसी को पड़ता है जो इसको बोलता है। वो बात अलग … Read more