`हिन्दी` भाषा में `अंग्रेजी` के उपयोग से बचा जाए

नरेंद्र श्रीवास्तव गाडरवारा( मध्यप्रदेश) ***************************************************************** हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है और जन-जन की भाषा भी। हिन्दी हमारे राष्ट्र में विविध बोली जाने वाली भाषाओं में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह बेहद खुशी और गौरव की बात है कि वर्तमान में हिन्दी में इतना लेखन हो रहा है जो इसके पहले कभी नहीं लिखा गया। … Read more

राष्ट्र,राष्ट्रीयता और राष्ट्रभाषा हिन्दी

प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी दिल्ली *************************************************************************** राष्ट्रभाषा को समझने से पहले राष्ट्र और राष्ट्रीयता शब्दों को समझना असमीचीन न होगा और राष्ट्र को समझने के लिए देश और जाति की अवधारणा को समझना आवश्यक है। राष्ट्र,राष्ट्रवाद तथा राष्ट्रीयता भी एक दूसरे में अंतर्ग्रंथित हैं,जो किसी देश की भाषा और संस्कृति को स्पष्ट करने में सहायक … Read more

अब तो संवैधानिक रुप से सिंहासन पर बैठाओ

मनोरमा जैन ‘पाखी’ भिंड(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* हिंदी जानती है उसे सतत् बहते रहना है, बहते-बहते ही उसे यहाँ अक्षुण्ण रहना हैl मर जाते हैं लोग वो जो जड़ से टूटे हों, कर निज भाषा सम्मान जिंदा रहना है…ll १४ सितम्बर,हिन्दी दिवस के लिए उसके सम्मान के लिए समर्पित तारीख। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने भी कहा है कि … Read more

चलो बाढ़ का मजा लें

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** देश में इन दिनों चहुंओर मानसूनी बारिश खूब बरस रही है। सालों बाद जरूरत के मुताबिक ऐसी बारिश देखने को मिली। हाँ,बरखा से जन व जमीन को सुविधा और दुविधा साथ-साथ हो रही है। आलम कहीं सूखे से राहत तो कहीं बाढ़ की आफत,तो कहीं फसल की खुशामद तीनोें हद की … Read more

बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने का मोदी संकल्प

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दूसरी पारी के सौ दिन पूरे होने के बाद अब प्रकृति-पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण-मुक्ति के लिये सक्रिय हैं। कुशल राजनीतिज्ञ की तरह वे जुझारू किसान एवं पर्यावरणविद की भांति धरती पर मंडरा रहे खतरों के लिये जागरूक हुए हैं। बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने एवं पर्यावरण की … Read more

मेंढकों का तलाक भी हो गया,अब तो थमो मेघराज…!

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************************************** हाय ये आसमानी आफत! मध्य प्रदेश सहित देश के पश्चिमी हिस्से में मानसून ने जिस अड़ियलपन के साथ डेरा डाल रखा है,उसने बारिश की सारी रोमांटिकता को ही बेस्वाद कर दिया है। दो माह पहले जिस कारे बदरा को रिझाने प्रदेश की राजधानी के महादेव मंदिर में मेंढकों का ब्याह हुआ … Read more

हिंदी को अनिवार्यत: करने से ही होगा भला

अजय जैन ‘विकल्प’ इंदौर(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** १४ सितम्बर को एक बार फिर हम ‘हिंदी दिवस’ मनाने की परम्परागत कोशिश करेंगे,औऱ अगले ११ महीने के लिए भूल जाएंगे। प्रश्न यह है कि ‘हिंदी दिवस’ कब तक-कितनी बार हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित हुए बिना मनाते रहेंगे ? यूँ कहें कि आजादी के इतने साल बाद भी हिंदी भाषा … Read more

हमारी हिंदी

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हर व्यक्ति की एक भाषा होती है,जो उसे जन्म से माँ द्वारा मिलती है।मैं सौभाग्यशाली हूँ जो हिंदुस्तान में जन्म लिया और हिंदी के रूप में मातृभाषा मिली। हिंदी एक ऐसी भाषा है,जो हमारे भावों को स्पष्ट रूप प्रदान करती है। हिंदी रस,छंदों और … Read more

भारतमाता की बिंदी है हमारी हिंदी

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. पावन पुनीत भारत धरती,पवित्र नदियों से सिंचित,मुकुट मणि गिरिराज ‍हिमालय जिसका प्रहरी और माथे का शुभ्र मुकुट है,जम्मू कश्मीर व हिमाचल प्रदेश जिसका पूर्णेन्दु बिंब फल-सा मुख है,कश्मीर से असम तक फैली हिमालय पर्वत श्रृंखलाएं जिसकी मेखला है,उत्तराखंड के कूर्मांचल,गढ़वाल व तराई-भावर का भाग जिसका वक्षस्थल … Read more

‘हिंदी दिवस’ क्यों मनाया जाता है १४ सितम्बर को ?

गुलाबचंद एन.पटेल गांधीनगर(गुजरात) ************************************************************************ १९१८ में गांधीजी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्र भाषा बनाने के लिए कहा था,हिंदी भाषा को जनहित की भाषा गांधीजी ने बताया थाl १९४९ में स्वतंत्र भारत के प्रश्न पर १४ सितम्बर को हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने का विचार-विमर्श करने के बाद में यह निर्णय लिया … Read more