अनार्याणां प्रवेश: निषिद्ध

सुशांत सुप्रिय  ग़ाज़ियाबाद (उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** पंडित ओंकारनाथ संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थेl लोग उनके पांडित्य का लोहा मानते थे। पांडित्य उन्हें संस्कारों में मिला था।एक और वस्तु जो उन्हें संस्कारों में मिली थी,वह थी-कुल का गौरव और जातिगत अभिमान। उच्च वर्ण का जातिय अहं उनकी नस-नस में भरा था। उनका मानना था कि उनकी शिराओं … Read more

नया बरगद,बूढ़े बाबा

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** “इसे ही ‘समय का फेर’ कहते हैं। आज मैं बेसहारा हूँ,लाचार हूँ,पर भगवन भक्ति से मुख नहीं मोड़ा है। यही कारण है कि मैं अपने वर्तमान को देख पा रहा हूँ। यहाँ बैठे-बैठे अपने साथ-साथ अतिथि भगवनों का भी पेट भर जाता है। समय-समय पर भक्ति-भजन और भंडारे का आयोजन … Read more

मेरी सखी

वीना सक्सेना इंदौर(मध्यप्रदेश) *********************************************** बेटे की शादी की तैयारियां लगभग पूर्ण हो गई थी। घर मेहमानों से भरा हुआ था। सिर्फ दो दिन बचे थे। आज हल्दी थी,कल महिला संगीत होगा,और परसों शादी..कि अचानक दरवाजे से मेरे पति की आवाज आई.. “अरे देखो कौन आया है..?” मैंने बाहर जाकर देखा तो रेखा खड़ी थी।रेखा मेरी … Read more

निशान्त

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** रमेश बाबू अपने वर्तमान से संतुष्ट थे। स्थानीय पोस्ट ऑफिस में क्लर्क की नौकरी शुरू की थी,वहीं पर अब पोस्टमास्टर हो गये थे।सरल,मीठा बोल,सहनशीलता उनका चरित्र बन गया था। अपनी मनमोहक मुस्कान से हर आने वाले का दिल जीत लेते थेl उनके अनुभव की छाप उनके चेहरे पर साफ झलकती … Read more

बदलते रिश्ते

डॉ.साधना तोमर बागपत(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** शालू ग्रीष्मकालीन अवकाश में एक महीने के लिए बच्चों के पास पूना आयी थी। बेटा,बहू और बेटी सब एकसाथ रहते थे। बेटी,बहू दोनों एक ही कम्पनी में इंजीनियर थी और बेटा अलग कम्पनी में। बेटा बहुत कम बोलता था,हर समय अपने काम में लगा रहता। उसे न घूमने का शौक … Read more

तनाव

वीना सक्सेना इंदौर(मध्यप्रदेश) *********************************************** “चल रोहित लंच करते हैं”,आशीष ने रोहित से आकर कहा।आशीष रोहित का सहयोगी था। ऑफिस में लंच टाइम हो चुका था,लेकिन रोहित का आज लंच करने का मन नहीं था। वास्तव में वह घर से लंच लाया ही नहीं था। कई दिनों से वह बहुत ही ज्यादा वर्क प्रेशर में अपने-आपको … Read more

आशंका

वीना सक्सेना इंदौर(मध्यप्रदेश) *********************************************** “मम्मी शुभी स्कूल से आ गई..!” ठीक साढ़े तीन पर अरिजीत का फोन आ जाता था। “नहीं बेटा अभी नहीं आई..” “घड़ी देखिए,पौने चार हो रहे हैं।थोड़ी देर बाद फिर फोन..बार-बार बेटे के फोन से अब सुधा जी को भी घबराहट होने लगी…क्योंकि,उनकी पोती स्कूल से रोज साढ़े तीन पर आती … Read more

योग,केला और भाला…

जितेन्द्र वेद  इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************* निशांत बार-बार सोच रहा था,पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि एक केले से देश का कौन-सा बड़ा नुकसान हो गया कि बात को इतना तूल दिया रहा था। एक अदद केला कुछ समय के लिए भूख मिटा सकता है। खड़े रहने की क्षमता दे सकता…और..कुछ पल के लिए ही … Read more

भड़ास बेंच

वीना सक्सेना इंदौर(मध्यप्रदेश) *********************************************** बच्चे स्कूल से आ चुके थे,उन्हें खिला-पिला कर तैयार कर नीचे खेलने के लिए भेज दिया पल्लवी ने। ४ बज चुके थे,इस समय तक पल्लवी थोड़ी अलसाई हुई हो जाती थी,इसलिए उसने अपने लिए एक कप चाय बनाई और बालकनी में आकर खड़ी हो गई। दूर-दूर तक फैली हुई हरियाली को … Read more

सबकी कर्मठ दादी

रेणु झा ‘रेणुका’ राँची(झारखंड) ******************************************************************* बचपन से देखा मैंने उस दादी को,वह सभी की दादी थी। हम उन्हें दादी कहते हैं,पापाजी भी दादी कहते हैं। यानी बच्चे,बड़े सभी की दादी। मेहता चाचा ने तो उन्हें सदाबहार, अन्तरराष्ट्रीय दादी की उपाधि दे दी थी। दादी मोहक व्यक्तित्व की धनी और ऊर्जा से सराबोर थी। उनका बस … Read more