अद्भुत नेतृत्व ‘नेताजी’

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** ‘नेताजी’,भूलना नहींहिन्दुस्तान की शान,हर बूँदबलिदान। ‘नेताजी’,सबके प्यारेसबको किया मुरीद,जुड़े फ़ौजशहीद। ‘नेताजी’,गाथा महानछोड़ा सकल जहान,देश प्याराहिन्दुस्तान। ‘नेताजी’,व्यक्तित्व प्रचंडन डरे दुश्मनभावना अखंडदेश। ‘नेताजी’,आज जरूरतबदलना बहुत कुछ,मानसिक गुलामीआजादी। ‘नेताजी’,पहला धर्ममान भारत कापहला कर्मराष्ट्रीयता। ‘नेताजी’,राष्ट्र प्रहरीसुभाष चंद्र बोस,माँ भारतीलाड़ला। ‘नेताजी’,भारत जन्मेंकोख कर्ज चुकायापुनर्जन्म नहींविडम्बना। ‘नेताजी’,विराट दृष्टिअखंड सीमा पक्षधर,नहीं झुकेराष्ट्रनायक। ‘नेताजी’,रक्त बलिदाननहीं भुला सकते।फिर चाहिए,सुभाष॥

महाकुम्भ:आँकड़ों में दबी चीखें…

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** श्रद्धालु स्मृति… श्रद्धा के महासमुद्र में डूबते प्राण गंगा किनारे,अलसुबह ठिठुरते नंगे पाँवश्रद्धा के विशाल पहाड़ तले दबे,कुछ नाम, कुछ साँसें, कुछ धड़कनें। भीड़ के समंदर में आस्था की एक लहर उठी,हजारों भुजाएँ पुण्य लाभ की आकांक्षा में फैलींपर लहर जब लौटी,तो कुछ मुट्ठियाँ खाली रह गईं। ये भगदड़ या … Read more

आस्था अवश्य, अंधराह मत गहना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सँग विवेक पूजन-वंदन हो, इसी समझ में रहना।आस्था रखो अवश्य बंधुवर, अंधराह मत गहना॥ ईश्वर देखे श्रद्धा-भक्ति, नहीं रूढ़ियाँ मानो,विश्वासों में ताप असीमित, पर धोखा पहचानो।ढोंगों-पाखंडों से बचना, समझ-बूझ में बहना,आस्था रखो अवश्य बंधुवर, अंधराह मत गहना…॥ जीवन को रक्षित तुम करना, नित ही जान बचाना,नहीं प्राण संकट में डालो, यद्यपि … Read more

आवश्यक है स्वच्छता

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* आवश्यक है स्वच्छता, समझो आज महत्व।बच्चों जीवन में सदा, याद रखो यह तत्व॥ कचड़ा कूड़ेदान पर, इधर-उधर मत फेंक,रोको फेंके अन्य तब, काम बहुत यह नेक॥ साफ-सफाई से रहो, सुनो लगा कर ध्यान।दांत खूब सब माँजकर, करो नित्य फिर स्नान॥ फल-सब्जी धो कर करें, भोजन में उपयोग।यही स्वच्छता गुण हमें, रखते सदा … Read more

भारत देश हमारा

मीरा सिंह ‘मीरा’बक्सर (बिहार)******************************* गणतंत्र दिवस:लोकतंत्र की नयी सुबह (२६ जनवरी २०२५ विशेष)…. जन गण मन सबसे प्यारा,जय-जय भारत देश हमारा।सारे जग में सबसे न्यारा,जय-जय भारत देश हमारा॥ लोकतंत्र की नयी सुबह है,जग में फैला है उजियारा।हरपल निखर रहा है भारत,जगमग इसका भाग्य सितारा।विश्व पटल पर सबसे रोशन,चमक रहा है एक सितारा।सारे जग में सबसे … Read more

मुश्किल जीना हो जाता

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कुछ समाज की रीति बुरी है,सच कहती हूँ बात खरी है,माँ की ममता, बहन का प्यार,हो जाता बिलकुल बेकार। अगर पति का साथ नहीं है,जीने का आधार नहीं है,प्रश्न खड़ा तब हो जाता है,मुश्किल जीना हो जाता है। कौन सम्हालेगा परिवार,कैसे हो इसका उद्धारजीने का अधिकार न होता,पहले सा व्यवहार न होता। … Read more

चढ़ता गया प्रगति के सोपान

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** गणतंत्र दिवस:लोकतंत्र की नयी सुबह (२६ जनवरी २०२५ विशेष)… पराधीन शासन का डंडा था, थी पराधीन जनता,स्वतंत्र भारत में भी रही थी, अंग्रेजों की मान्यताऐसे में अपना संविधान बने, समय की थी खतासंविधान निर्माण में जुट गए संविधान निर्माणकर्ता। २६ जनवरी की सुबह लायी अपना विधान, संविधान,भारत के लिए ये स्वर्णिम … Read more

जागे जब भारतवासी

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ गणतंत्र दिवस:लोकतंत्र की नयी सुबह (२६ जनवरी २०२५ विशेष)… छब्बीस जनवरी आई,कुछ याद पुरानी लाईजागे जब भारतवासी,हमने आज़ादी पाई। जाने कब से इस भू-पर,काले बादल छाये थेसूरज छिप कर बैठा था,हम पर भय के साये थे।फिर अजब हवा लहराई,सत की छिड़ गई लड़ाई। हमसे डर गया फिरंगी,भागा निज स्वत्व बचा करहमने खुद को … Read more

रामलला आए अवध

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नगर अयोध्या धाम में, बसे राम के प्राण।कण्ठहार रघुवर पुन:, आये जन कल्याण॥ हुई प्रतिष्ठा अवध में, पावन जन्म स्थान।दीपशिखा आलोक से, ज्योतिर्मय भगवान॥ राम लला आये अवध, बीत गया इक वर्ष।धन्य हुई भारत धरा, रामराज्य उत्कर्ष॥ मर्यादित कुल आचरण, उज्ज्वल राम चरित्र।कौशलेन्द्र सीतारमण, भज लो नाम पवित्र॥ रघुनंदन … Read more

भारतवासी माटी पूजे

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* भारतवासी माटी पूजे, तुमको बात बताता हूँ।बहती है गंगा-यमुना, मैं गीत वहाँ के गाता हूँ॥पर्वतराज हिमालय जिसके हर संकट को हरता है,तीन ओर का सागर, जिसकी चरण-वंदना करता है॥ बच्चो जानो, भारत माँ को, जिसका कण-कण सुंदर है,शस्य श्यामला मातृभूमि है, पर्वत-नदियां अंदर है।ताल-तलैया,मैदानों की, आभा बहुत लुभाती है,मेरे बच्चो! दुर्ग-महल … Read more