जय माँ सरस्वती

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** जय -जय-जय माँ सरस्वती,हे सकल विश्व भव तारिणीतेरे शरण मैं आई माता,जय माँ कष्ठ निवारिणी। शुभ्रवस्त्रा धारिणी माता,जय माँ हंस सवारिनीजय-जय-जय पद्मासना देवी,हे माँ ज्ञान प्रकाशिनि। विद्या-बुद्धिदायिनी माता,जय माँ जग उध्दारिणीज्ञान का दीप जला दो माता,जय माँ वीणा वादिनी। कमल आसन शोभित माता,वीणा-पुस्तक धारिणीभक्तों का दुःख हरती माता,जय-जय-जय जगतारिणी। तीनों लोक … Read more

स्नान का खेला है जीवन

ऋचा गिरिदिल्ली******************************** जीवन स्नान का खेला है…?या कुम्भ के स्नान का मेला…? जीवन चक्र जब शुरू हुआ स्नान से,यही चक्र फिर ख़त्म हुआ स्नान पर। पहला पाप शुरू करने से पहले,आखिरी पाप करने के बादविडम्बना तो देखो,दोनों स्नान के लिए हम सक्षम नहीं। फिर, कुम्भ का स्नान,कार्तिक स्नानमहाकुंभ कामाघी पूर्णिमा, पौष पूर्णिमाऔर महाशिवरात्रि स्नान,के लिए … Read more

प्रजातंत्र-गणराज्य

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* गणतंत्र दिवस:लोकतंत्र की नयी सुबह (२६ जनवरी २०२५ विशेष)… “लोगों ने, लोगों के लिएलोगों द्वारा चलाई गई सरकार”,ऐसा ही कुछ कहा था अब्राहम लिंकन नेप्रजातंत्र के गणराज्य के लिए,दुनिया के सबसे बड़े प्रजातंत्रभारत गणराज्य के ज़िम्मेदार प्रजासरकार बनाने वाले हम सैंकड़ों साल,किसी न किसी शासक केबने रहे गुलाम या बना दिए … Read more

कुछ रिश्तों के नाम नहीं होते

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तुमसे अब महीनों बादमुलाक़ात होती है,दिन में न सहीसपनों में बात होती है। गिले-शिकवे सब भुलाकरदिल ही दिल ने तकरार होती है,तेरे कदमों की आहट सुनकरखुशियों की बौछार होती है। उम्मीदों के आसमान परअक्सर बादल घनघोर छा जाते हैं,मन में उठी प्रीत की उमंगक्यों हकीकत में बयां नहीं होती है। कुछ … Read more

ऐसे ही आता ‘वसंत’

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… वसंत के आने सेमन गुनगुनाता,प्यार का पंछी भीकोयल संग गुनगुनाता है,उन्हें देखधड़कन ऐसी धड़कती, किटेसू भी शरमा जाता हैकहते ‘वसंत’ ऐसे ही आता है। आम पर फूल खिल जातेसरसों से पीले खेत,मानो धरती पर हल्दी लगाते हैंगेहूँ की बालियाँ खेतों में,हरियाली की चादर बिछाती … Read more

तृष्णा है तिमिर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* तृष्णा है ऐसा तिमिर, लिप्त अंध इन्सान।शील त्याग सत्कर्म तज, सहता नित अपमान॥ अति तृष्णा मद क्रोध से, भटक रहा इन्सान।चलें झूठ छल कपट पथ, हिंसक जग शैतान॥ तृष्णा कलियुग महाबली, सत्य न्याय आचार।पतन नहुष सम हो विकट, कामुक मन लाचार॥ काम क्रोध मद लालची, सब अनीति बन नीति।अपनापन … Read more

चलो कुम्भ चलें

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** प्रयागराज आपके स्वागतके लिए सजा है,१४४ साल बाद कुम्भका अलग मजा है। त्रिवेणी संगम मेंडुबकी लगाएं,अपना जीवनसफल बनाएँ। देश-विदेश से लोगकुम्भ आ रहे हैं,सनातन धर्म के प्रतिअपनी आस्था जता रहे हैं। यह अवसर जिंदगी मेंदोबारा नहीं आएगा,अगर नहीं जा पाएतो मन में अफसोस रह जाएगा। महा-स्नान के अवसर परकरोड़ों … Read more

अद्भुत नेतृत्व ‘नेताजी’

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** ‘नेताजी’,भूलना नहींहिन्दुस्तान की शान,हर बूँदबलिदान। ‘नेताजी’,सबके प्यारेसबको किया मुरीद,जुड़े फ़ौजशहीद। ‘नेताजी’,गाथा महानछोड़ा सकल जहान,देश प्याराहिन्दुस्तान। ‘नेताजी’,व्यक्तित्व प्रचंडन डरे दुश्मनभावना अखंडदेश। ‘नेताजी’,आज जरूरतबदलना बहुत कुछ,मानसिक गुलामीआजादी। ‘नेताजी’,पहला धर्ममान भारत कापहला कर्मराष्ट्रीयता। ‘नेताजी’,राष्ट्र प्रहरीसुभाष चंद्र बोस,माँ भारतीलाड़ला। ‘नेताजी’,भारत जन्मेंकोख कर्ज चुकायापुनर्जन्म नहींविडम्बना। ‘नेताजी’,विराट दृष्टिअखंड सीमा पक्षधर,नहीं झुकेराष्ट्रनायक। ‘नेताजी’,रक्त बलिदाननहीं भुला सकते।फिर चाहिए,सुभाष॥

महाकुम्भ:आँकड़ों में दबी चीखें…

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** श्रद्धालु स्मृति… श्रद्धा के महासमुद्र में डूबते प्राण गंगा किनारे,अलसुबह ठिठुरते नंगे पाँवश्रद्धा के विशाल पहाड़ तले दबे,कुछ नाम, कुछ साँसें, कुछ धड़कनें। भीड़ के समंदर में आस्था की एक लहर उठी,हजारों भुजाएँ पुण्य लाभ की आकांक्षा में फैलींपर लहर जब लौटी,तो कुछ मुट्ठियाँ खाली रह गईं। ये भगदड़ या … Read more

आस्था अवश्य, अंधराह मत गहना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सँग विवेक पूजन-वंदन हो, इसी समझ में रहना।आस्था रखो अवश्य बंधुवर, अंधराह मत गहना॥ ईश्वर देखे श्रद्धा-भक्ति, नहीं रूढ़ियाँ मानो,विश्वासों में ताप असीमित, पर धोखा पहचानो।ढोंगों-पाखंडों से बचना, समझ-बूझ में बहना,आस्था रखो अवश्य बंधुवर, अंधराह मत गहना…॥ जीवन को रक्षित तुम करना, नित ही जान बचाना,नहीं प्राण संकट में डालो, यद्यपि … Read more