क्यों भागे रे मन ?

ऋचा गिरिदिल्ली******************************** क्यों भागे रे मन ?दौड़े जाए रह ना पाए,ढूंढे हर आँगनबिलख-बिलख कर ताके-झाँके,रह-रह जाए वन। ठहरे हुए जल में मारेजैसे कोई कण,नाचता हुआ दिखेनहीं लगता मलंग-मलंग,क्या बीती ? कैसी नीति ?जब उठना जलतरंग,क्या ऐसी ही प्रकरण ?क्यों भागे रे मन…? मुंडेर पर चढ़कर अँखियाँ मींचेप्रच्छन्न-सा क्रंदन,कहता जाए कौतूहल-साआ जाए वही क्षणक्यों भागे रे … Read more

खुशियाँ लेकर आया पर्व

मीरा सिंह ‘मीरा’बक्सर (बिहार)******************************* मकर संक्रांति पर्व निराला,खुशियाँ लेकर आया हैलोग सभी खुश हुए मग्न हैं,मन सबका हर्षाया है। एकसाथ मिल क‌ई पतंगें,आसमान में छायीं हैंइतराती बलखाती देखो,गीत खुशी के गायीं हैं।दिन आया है उत्सव वाला,बादल ढोल बजाया है॥ साथ हवा के पेंच लड़ाती,कहाँ-कहाँ मुड़ जाती हैंआगे-पीछे ऊपर-नीचे,सभी दिशा में जाती हैं।उत्तरायण हुए सूरजमल,मौसम प्यारा … Read more

उड़ी-उड़ी रे पतंग…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* उड़ी-उड़ी रे पतंग,तेरे-मेरे एहसासों के संगलिए जीवन के हर रंग,संक्रांति पर होकर मस्त मलंग। उड़ी-उड़ी रे पतंग,न रख डोरी को तंगमन का मांझा ढील दो तब,आसमान से बातें करे पतंग। उड़ी-उड़ी रे पतंग,लिए तिल गुड़ मिठास के संगआशाओं के उड़ान भरने चले,भले हो सबके अलग अलग ढंग। उड़ी-उड़ी रे पतंग,उत्तरायन की … Read more

जग में कोई नहीं तुम जैसा

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************************** श्री शिवाय नमस्तुभ्यम… मन से मिटे विकार सब, शुद्ध बने यह देह।हे भोले करना कृपा, मिले आपका स्नेह॥ मिले आपका स्नेह प्रभु, हे शिव भोलेनाथ।जीवन मेरा धन्य हो, रखना सिर पर हाथ॥ रखना सर पर हाथ प्रभु, हे शिव शक्ति महान।इस जग में कोई नहीं, तुम जैसा भगवान॥ तुम जैसा … Read more

मकर राशि उत्सव प्रथम

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मकर संक्रांति विशेष…. पौष मास संक्रान्ति में, करे सूर्य धनु त्याग।मकरराशि उत्सव प्रथम, पुण्य अतिथि अनुराग॥ मकर संक्रान्ति दिवस शुभ, पर्व सनातन धर्म।सदा चतुर्दश जनवरी, परम्परा सत्कर्म॥ बिहू या लोहड़ी कहीं, है पोंगल त्यौहार।कहीं तिल संक्रान्ति यह, दधि चूड़ा आहार॥ शस्य श्यामला खेत है, फसलों से आबाद।खुशियाँ फैले देश … Read more

गीत ख़ुशी के गाओ

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** मकर राशि में सूर्य आया,तिल-तिल दिन को बढ़ना भायासर्दी को अब दूर भगाओ,सब मिल गीत ख़ुशी के गाओ। गाँवों में किसान हर्षाए,खेतों में फसल पक जाएगुड़ और तिल का भोग लगाएँ,एकसाथ सब मिल कर गाएँ। स्नान, दान और पूजा-पाठ,सबके प्रभु सँवारें काजखिचड़ी, पोंगल, लोड़ी साथ,अनेकता में एकता का राज। आसमान में रंग-बिरंगी,बिखर … Read more

ग्रन्थ रत्न अनमोल

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ग्रन्थ रत्न अनमोल हैं, मिलता इनसे ज्ञान।पढ़कर इनको हम सभी,बनते हैं विद्वान॥ पढ़ें ग्रन्थ अध्यात्म के, जीवन करें  सुधार।अपनाएं सन्मार्ग को, हो जाएं भव पार॥ मानस तुलसी का पढ़ें, मर्यादा लें जान।ग्रंथों में जो रत्न सम, करें सभी सम्मान॥ कर्मों का विज्ञान है, गीता ग्रंथ महान।जीवन के हर दुःख का, … Read more

दर्शन पर्यटन

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** अद्भुत है पहाड़ पहरी,केदारनाथ जी हिमगिरि…बद्रीनाथ जी धाम है,अलौकिक रूप प्रणाम है…। जम्मू में त्रिकुटा पावन,वैष्णो माता मनभावन…स्वर्ण मंदिर बार्डर बाघा,अमृतसर गौरव गाथा…। हरिद्वार गंगा मैया,धर्म ध्वजा शीतल छैंया…वृन्दावन, बरसान अवध,काशी बनारस गंगा तट…। चित्रकुट मैहर की माता,महाकाल भाग्य विधाता…झांसी, ओरछा, ग्वालियर,इंदौर से ओंकारेश्वर…। तिरूमाला का तिरुमंदिर,जा छंटता मन घोर तिमिर…सुंदर विशाखापट्टनम,देख … Read more

तस्वीर तुम्हारी, तकदीर हमारी

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** मेरी आँखों में बसी है तस्वीर तुम्हारी,जिंदगी बस ख्वाब है, ये तकदीर हमारीखुशबू बहती हवाओं में, आ रही है खुमारी,तुझे देख सब भूला, जब तुमने फिजा सँवारी। पास आने पर धड़कता क्यों दिल,चाँद बादल में छुपने से डरता क्यों ?हवा ने जब बादलों को ये समझाया,ठंडी हवा ने चेहरे से घूँघट सरकाया।मेरी … Read more

विश्व पटल मान विवेकानंद जी

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** ‘विवेकानंद’,युवा प्रेरणाविश्व पटल मान,भारत अभिमानअभिनन्दन। ‘विवेकानन्द’,दी पहचानकरे विश्व गुणगान,विदेश संदेश,अध्यात्म। ‘विवेकानंद’,श्रेष्ठ कर्मअखिल हिन्दी उत्कर्ष,हिंदी श्रेष्ठगौरव। ‘विवेकानंद’,सबको बतायाश्रेष्ठ भारतीय सभ्यता,संस्कृति महानज्ञान। ‘विवेकानंद’,स्पष्ट लक्ष्यसीख सदा संघर्ष,युवा संघटित,उत्कर्ष। ‘विवेकानंद’,हमारा नमनआलोकित पथ किया,भाव अनमोलसौरभ। ‘विवेकानंद’,भारत सपूतजागृति दीया जलाया,दिया संदेश,जागो। ‘विवेकानंद’,ज्ञान-बीजनाम रोशन किया,वेदांत बोयासेवा। ‘विवेकानंद’,प्रेरणा स्रोतशक्ति है अंदर,विश्वास दिलायावंदन। ‘विवेकानंद’,देश प्रथमदिल खुला रखा।परमहंस गुरु,मकरंद॥