क्यों भागे रे मन ?
ऋचा गिरिदिल्ली******************************** क्यों भागे रे मन ?दौड़े जाए रह ना पाए,ढूंढे हर आँगनबिलख-बिलख कर ताके-झाँके,रह-रह जाए वन। ठहरे हुए जल में मारेजैसे कोई कण,नाचता हुआ दिखेनहीं लगता मलंग-मलंग,क्या बीती ? कैसी नीति ?जब उठना जलतरंग,क्या ऐसी ही प्रकरण ?क्यों भागे रे मन…? मुंडेर पर चढ़कर अँखियाँ मींचेप्रच्छन्न-सा क्रंदन,कहता जाए कौतूहल-साआ जाए वही क्षणक्यों भागे रे … Read more