यही कुंभ है…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ यह सत्य का उदघोष है, सनातन संस्कृति का प्रभाव है,आस्था की डुबकी में हमारी विरासत हैसंस्कारों में हमारा धर्म है,यही कुंभ है…। सनातन की धरोहर कहें या,संस्कृति का अटूट प्रयासहिन्दू होने की जिम्मेदारी है,शाही स्नान व पर्वों की सार्थकता से प्रफुल्लित होता प्रयाग,यही कुंभ है…। यह सैलाब है जनसमुदाय का,साधु-संत-तपस्वीयों … Read more

स्वामी जी संस्कारों की शान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* स्वामी जी थे युगपुरुष, संस्कारों की शान।जो कायम करके गए, गति-मति के सँग आन॥ विश्व सभा में छा गए, फैलाया आलोक।मूल्य सनातन की चमक, कौन सकेगा रोक॥ युवा चेतना की दमक, युगों रहे बन इत्र।समझ रहे हैं हम सभी, बनकर मानव मित्र॥ आज जयंती पर दिखा, फिर से नवल विवेक।आओ! हम … Read more

भोले, सुन मन की बात

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************************** श्री शिवाय नमस्तुभ्यम… भोले कृपा निधान सुन, मेरे मन की बात।जपता हूँ मन से तुझे, ओम् नमः दिन-रात॥ ओम् नमः दिन-रात प्रभु, लेता हूँ मैं नाम।हे भोले करना कृपा, मिले मुक्ति का धाम॥ मिले मुक्ति का धाम प्रभु, सदा लगाऊँ ध्यान।शम्भु-शिवादेवी तुम्हीं, दो जीवन वरदान॥ दो जीवन वरदान अब, शिव … Read more

मेरी हिंदी को चाहिए निर्मल विचार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** उदित कर सके जन-मन में,विश्व-हित सार्थक संस्कारमेरी हिंदी को चाहिए बस,इसके लिए निर्मल विचार। यह विश्व आज व्यथित,अपनी स्थिति पर पीड़ितजग का रूपान्तरण भी,अब तुम पर अवलंबिततुम बनो प्राण नवयुवकों में,हो संचरित सुसंस्कृत परिष्कार।मेरी हिन्दी को चाहिए बस,इसके लिए निर्मल व्यवहार…॥ आत्मा के भाव जगाने को,नव निनाद से हो गुंजितनवयुग के नायक … Read more

जीवन हो गतिमान, यही कामना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* जीवन हो गतिमान, यही कामना मैं करूँ।बढ़े सभी की शान, सुख को जियरा में भरूँ॥ हर पल में आनंद, अच्छाई को यदि वरूँ।बुरे काम कर बंद, अपना सारा दु:ख हरूं॥ मैं-मैं करना छोड़, हम के पथ पर हम चलें।अहंकार को तोड़, मृदु बन जाएँ, क्यों खलें॥ कितना कटु है आज, तज … Read more

कटकर गिरा धरा पर मैं

सौ. निशा बुधे झा ‘निशामन’जयपुर (राजस्थान)*********************************************** छोड़कर बंधन में चला,चला अकेला चलाफिर ये जाना वो एक,जो छूट गया मेरा अपना पीछे। बंधन नहीं था मंजूर मुझे,दूर जो आकाश दिखापास जा के जाना,यह तो भ्रमित करता रहा मुझे। छूट गए सब अपने मेरे,बस! एक बार फिर लौट आएं।वो घर-आँगना चहचहाहट,ले आओ कोई वो मेरे पाँव जमीं … Read more

उड़ान पतंगों-सी…

मानसी श्रीवास्तव ‘शिवन्या’मुम्बई (महाराष्ट्र)****************************************** मैंने सीखा है पतंगों से, ऊँचा उड़ना नभ में। न रखा है अभियान किसी से,स्वाभिमान भरे इस जीवन में। कटने का भय भी है, बचने की आशा के साथ। डोर दे रखी है जीवन की, परमेश्वर के हाथों में। एक उड़ती पतंग सिखाती है, ताल-मेल से रहना।  मर्यादाओं को भंग किए बिना, स्वयं को बहारना व … Read more

शुभ प्रभात

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* शुभ प्रभात में पुष्प खिले हैं, मेरा मन हरषाये।पेड़ों पर पँछी बैठे हैं, गीत अनोखे गाये॥ आसमान पर बादल, लगता जैसे चित्र उकेरे,झूम रही है डाली-डाली, खुशियों के है डेरे।रंग-बिरंगे फूल खिले जो, मेरे मन को भाये,पेड़ों पर पँछी बैठे हैं, गीत अनोखे गाये॥शुभ प्रभात…. अविरल नदिया की धाराएँ, अपनी … Read more

प्यारी हिंदी

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** हिंदी हमारी जान है हिंदी हमारी शान।हिंदी से ही ऊँचा नाम है हिंदी से संवरे काम॥ हिंदी विश्ववास बढ़ाती हिंदी सम्मान दिलाए।हिंदी जगदर्शिका है हिंदी ही मार्ग बताए॥ हिंदी की बिंदी है सुंदर हिंदी है खुशहाल,हिंदी भाषा है हमारी हिंदी ही अभिलाषा॥ हिंदी मेहनत की रानी है हिंदी ही महारानी।शिक्षा … Read more

मेरी माँ हिंदी

ऋचा गिरिदिल्ली******************************** नम चक्षु, तिमिर का जाल,दरवाजे पर दस्तक हुईथरथराते हाथों से कुंडी खोली,सामने वह खड़ी दिव्य रोशनी के साथमनोभावों से मेरे दोनों हाथ जुड़ गए। इस मुलाक़ात के बाद,मैं अधीन होती चली गईउसने ‘कुछ’ नहीं दिया,उसने बहुत कुछ दिया। और सिखा दिया,अर्जित करनामैं इसकी हो गई,और ये उन सबकीजो आए इसकी शरण में। कहीं … Read more