छायावादी युग की एक स्तंभ

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)******************************** आधुनिक मीरा ‘महादेवी वर्मा’ (पुण्यतिथि विशेष)…. आधुनिक युग की मीरा कहलाए,महादेवी वर्मा की जब नाम आए। छायावादी युग की वो एक स्तंभ,कविता रेखाचित्र संस्मरण निबंध। जन्म स्थान फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश,मृत्यु स्थान प्रयागराज उत्तर प्रदेश। रहस्यमयी और वेदना भरी कविताएं,निहार हिन्दी में पहली काव्य आए। आत्मा और परमात्मा के तो संबंध,उनकी रश्मि कविता … Read more

हिंदी हम भारतीयों में रहेगी

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )****************************** जन मन का भाव हिन्दी (हिन्दी दिवस विशेष)… आज हम ‘हिंदी’ का गुणगान करते हैं,ये भाषा नहीं, हमारे ‘देश’ का सम्मान हैसूरज-चाँद सितारे जब तक हैं,तब तक ‘हिंदी’ हम भारतीयों में रहेंगी…। सदियों की ‘विरासत’ से मिला,हमें ‘शब्दों’ का सरल ज्ञानआज तभी हम ‘सब’ करते इसका सम्मान,इसीलिए तो हम कहते … Read more

हिन्दी है हिन्द की रानी 

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)**************************************** जन मन का भाव हिन्दी (हिन्दी दिवस विशेष)…. हिंदी के बिना शान अधूरी,लिखने पढ़ने की हर बात अधूरीहिंदी है हिंद की रानी,हर स्कूल सुना रहा हिंदी की कहानी। अंग्रेजी के संक्रमण से हो गई बीमार,मिश्रण से अलग करना होगाये ही शुद्ध हिंदी का उपचार,दूसरे प्रदेशों में हम हो जाते लाचार। बातें … Read more

मौन रहकर भी…

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ आधुनिक मीरा ‘महादेवी वर्मा’ (पुण्यतिथि विशेष)… मौन रहकर भी जिसने क्रांति का शंखनाद किया,हर बंधन को तोड़कर नवयुग का आगाज़ कियाबन वियोगिनी राधिका-सी पीड़ा पर अभिमान किया,नारी-अस्मिता का भव्य, अनूठा श्रृंगार किया। तुमने तो अपनी पीड़ा को करुणा का वरदान दिया,अक्षरों के मर्मस्थल को स्नेहिल सात्विक ज्ञान दियागुलमोहर की छाँव … Read more

प्रेरणा जगाती हिम्मत

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)********************************** कौन जगाता है सोई हिम्मत,जब मन हारने लगता है ?कौन अँधेरों के बीच खड़ा,उजियारा करने लगता है ? प्रेरणा जगाती सोई हिम्मत,मन में आशा का दीप जलाती हैठहरे हुए कदमों को वह,फिर से चलना सिखलाती है।  कभी गिरकर फिर उठने वाला,मन को साहस दे जाता हैपेड़ से टूटता पत्ता भी कभी,जीवन का … Read more

शिवोहम

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** जब ज्योति प्रेम की जलती है,मन में उजियाला करती हैकहीं भक्ति भावना जाग उठे,मन आप शिवाला करती है। मन आप शिवाला करती है,शिव धुन में ही रहती हैमिल जाए कोई शिव जैसा,शक्ति का रूप धर लेती है औघड़ दानी वरदान सहज,हर कंटक माला करती हैहर-हर बम-बम की धूम मची,कष्टों का निवाला करती … Read more

मैं हूँ स्त्री

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ***************************************** कहती हूँ सुनो- मैं हूँ स्त्री, मैं हूँ स्त्री,बिल्कुल भोली और बिल्कुल सीधीयहाँ मेरा अपना कोई घर-बार नहीं,फिर भी मेरे बिना कोई संसार नहीं। मैं पिता की लाड़ली, माँ की दुलारी,भाई की राखी, आँगन की फुलवारीससुराल की लक्ष्मी, मायके की जान हूँ,मैं पिता और पति दोनों का सम्मान हूँ। मैं … Read more

हिंदी तुझे मैं क्या लिखूं

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)****************************************** हिंदी तुझे मेरा बंधन,तन, मन, धन, जीवन अर्पणऐ हिंदी तुझे हर पल मैं लिखूं,मेरे माथे की तू बिंदी, हिंदी। क्या अब, क्या कल, क्या बरसों ?जनम-जनम के जज्बात मैं लिखूं,मेरे हिंदी तुझे हर बार लिखूं,अपना मन, अपना स्वप्न लिखूं। जीवन लिख दूं जन्म-जन्म लिख दूं,हे हिंदी तुझे मैं हर बार लिखूंमधुर मिलन … Read more

हिमालय रक्षक

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)*************************************** है गिरिराज हिमालय बनकर चौकीदार खड़ा,रिपु किंचित आ नहीं सकता रक्षक बन अड़ा। भारत का है गौरव हिमगिरि मंगलगीत सुनाता,वन से भरा हुआ है हरीतिमा को बिखराता। हवा हमें सुहानी देता वनोपज से दुलराता,बना हुआ है प्यारा हरदम सबको ही भाता। पर्यावरण का रक्षक नित ही देता है साँसें,पर अब उसे … Read more

पापा, लौट आओ ना…

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ***************************************** पापा फिर से लौट आओ ना,अपने में मुझे फिर समेट लो नादुनिया की भीड़ में खो गया हूँ मैं, आपके बिना पापा हताश हो गया हूँ मैं।  आपकी फटकार में छिपा था प्यार,आपके वचनों में समाया था संसारआपके जाने के बाद संसार सूना है,हर खुशी अब अधूरी आपके बिना है। बहुत … Read more