नजराना

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** कायनात के मालिक से,नजराना धरा ने पाया, देखो सूरज फिर अम्बर दीप बनकर धरा पे आया। साथ वो अपने रौशन किरणों का नया सबेरा लाया, इसके आने से कायनात ने फिर इक नया आज पाया। शबनम सूख गई दृख्तों के पात पे, चहचहाहट चिड़ियों की होने लगी हर … Read more

पत्थर की चाह

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ रोहतक (हरियाणा) ******************************************************* बैठा था मैं नदी किनारे, पीठ लगा पत्थर के सहारे एक विचार मेरे मन आया, प्रभु तेरे विधान हैं न्यारे। नदी किनारे प्यासा पत्थर, कैसे पड़ा हताशा पत्थर कहा अनुभूति की भाषा में, तू क्या लगाये आशा पत्थर। क्या है तेरी चाह बता दे, निज हृदय की थाह बता … Read more

दिल का हाल किसे बतलाएं

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ किस-किसको बतलाएं, हाल ये दिल का। कहते हुए भी शर्माएं हाल ये दिल का, जिससे हमें हुआ है प्यार, कैसे बतलाएं उनको। कहीं सुनकर वो मेरी बात, रूठ न जाएंll वैसे भी इस दिल में गम का भंडार पड़ा है, इसमें से कुछ को कम किया जाए इजहार करके। या फिर … Read more

मासूमों की दर्द भरी चीत्कार

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** आत्मा से आत्मा की आवाज सुनाना चाहती हूँ, गुजरते हुए वक्त की दस्तक सुनाना चाहती हूँ। जो नन्हीं मासूमों की चीखों को सुन सहमे नहीं, उन मासूमों की दर्द भरी चीत्कार,सुनाना चाहती हूँ। मर गयी है उनकी आत्मा जो रिश्तों का खून कर, वहशी दरिन्दे हैं उनकी हैवानियत का हाहाकार सुनाना … Read more

बेटियाँ

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** जिन्होंने हमारी बेटियों को नोंच-नोंच खाया, अबोधिनी ने स्वयं को कितना अकेला पाया होगा रक्त से तर देह पर, न जाने कितने प्रहार सहे होंगे पीड़ा में काँपती जुबां ने, ‘माँ’ पुकारा होगाl नादान थी वह, अच्छे-बुरे का फर्क नहीं पहचानती थी आदमी और आदमी में भी अन्तर … Read more

बलात्कारी भी हो सकता है मानव बम

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** मानव बम की खोज,किए मानव के दुश्मन, हत्या करते रोज,लूटकर मानवता धन। निर्दोषों को मार,स्वयं भी हैं मर जाते, मानवता का अन्त,खुदा के नाम लिखाते॥ बलात्कार-दुष्कर्म,उसी साज़िश का हिस्सा, घटना को लो जोड़,नहीं साधारण किस्सा। सोची-समझी चाल,चलें अब ये नरभक्षी, उनको है यह ज्ञात,कोर्ट उनका है रक्षी॥ रपट और कानून,सबल … Read more

हाँ हूँ एक बुरी माँ

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’  भोपाल (मध्यप्रदेश) ************************************************************ कैसे सिखाऊं अपनी बेटी को ‘बर्दाश्त’ करना…! एक ऐसे परिवार को जो उसका ‘सम्मान’ न कर सके…, कैसे सिखाऊं कि पति की ठोकर खाना सौभाग्य की बात है…! मैंने तो सिखाया है ईंट का जवाब पत्थर से दो…, अगर कोई कहे तो कहता रहे… हाँ हूँ मैं एक बुरी … Read more

ये तपती धरती..

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** गर्मी का वार हो रहा है, पारा पचास से भी पार हो रहा हैl लू के थपेड़े पड़ रहे, बढ़ रही गर्मी तप रही धरती भानु की आग से जल रही धरतीl पेड़-पौधों की कमी खल रही, तपती धरती से पेड़-पौधे भी जल रहेl बदलते मौसम की ये मार पड़ रही, … Read more

काश ऐसा हो!

अमल श्रीवास्तव  बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************************* काश कालिमा मिट जाये,रवि-सा उजियारा छा जाये, भारत फिर आर्यावर्त बने,पथ सारे जग को दिखलाएl यों तो यह अपना देश कभी,धार्मिक तत्वों का वेत्ता था, दुष्कृत्यों को षडयंत्रों को,सत्कृत्यों से धो देता थाl पर इसमें पाप प्रविष्ट हुआ,वह ध्यान,धर्म, धीरज न रहा,दिन-रात वही,धन-धाम वही,पर सत्य,शील,संयम न रहाl इसलिए जलाओ ज्ञान दीप,अज्ञान … Read more

वह कौन है…

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** हवाओं की रवानगी थी, मेरी रफ़्तार भी कुछ तेज थी मौसम खराब का अंदेशा था, थोड़ा मन डरा हुआ था। हर कदम पर कोई पीछा कर रहा था, जैसे कदम रुकते वो भी थम-सा जाता था, कई बार ऐसा महसूस हुआ फिर मैं बोली कौन हो तुम ? सामने क्यो नहीं … Read more