नजराना
हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** कायनात के मालिक से,नजराना धरा ने पाया, देखो सूरज फिर अम्बर दीप बनकर धरा पे आया। साथ वो अपने रौशन किरणों का नया सबेरा लाया, इसके आने से कायनात ने फिर इक नया आज पाया। शबनम सूख गई दृख्तों के पात पे, चहचहाहट चिड़ियों की होने लगी हर … Read more