कर्म

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** कर्म कर बंदे तू कर्म कर, दिन-रात सुबह-शाम कर्म कर लाख आएं मुसीबतें पथ पर, खड़े रहो तुम कर्म रथ पर। कर्म कर बंदे तू कर्म कर… कर्म कर बंदे तू कर्म कर, असफलताओं से सीख कर बाधाओं से सदैव लड़ कर, बस आगे ही आगे बढ़ सुन्दर … Read more

ये कैसी जवानी है…?

आरती जैन डूंगरपुर (राजस्थान) ********************************************* अलीगढ़ में मासूम बेटी की घटना पर आधारित…… हाथ लगाया तो डर गई, बाहर निकाला तो मर गईl मछली नहीं यह लड़की की कहानी है, नोंच दिया मासूम को ये कैसी जवानी है ? कौन-सा सिखाता है तुम्हें मजहब, दिखाओ हैवानियत का तुम यह करतबl ढंके बदन की करते हैं … Read more

क्या करें,क्यों करें

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ क्या करें,क्यों करें,किसके लिए करें, कोई तो हमें समझाए। मिला है मानव जन्म हमें, तो कुछ अच्छा कर जाएं… ताकि ये जीवन सफल हो जाए। कितना कुछ हम लोगों ने, देश-दुनिया को बदल दिया। पर खुद को हम बदल न पाए, बढ़ते दूसरों के कदमों को, खींचकर पीछे जरूर हम लाए… … Read more

मैं मन हूँ

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ रोहतक (हरियाणा) ******************************************************* मैं मन हूँ विचारों का-भावों का, परिचायक हूँ खुशी का घावों का इच्छा,जीवन गति का जनक हूँ, मैं ही शांति हूँ-में ही भटक हूँ। मैं ही चेतन हूँ-अविनाशी हूँ, सब प्राणियों में मैं सर्वव्यापी हूँ मैं शाश्वत हूँ-न सोता-जागता हूँ, बस चलना मेरा काम-भागता हूँ। जो मुझे जान लेता … Read more

सवाल

मालती मिश्रा ‘मयंती’ दिल्ली ******************************************************************** ये दिल मेरा कितना खाली है पर इसमें सवाल बेहिसाब हैं, मैं जवाब की तलाश में दर-दर भटक रही हूँ, पर मेरे दिल की तरह मेरे जवाबों की झोली भी खाली है। ये दिल मेरा… भरा है माता-पिता के प्रति कृतज्ञता से, भाई-बहनों के प्रति प्यार और दुलार से, माँ … Read more

वृक्षों के कटने का दर्द

मानकदास मानिकपुरी ‘ मानक छत्तीसगढ़िया’  महासमुंद(छत्तीसगढ़)  *********************************************************************** हमसे पूछो वृक्षों के कटने से दर्द कैसा होता है, कोई हमारा घर जलाता है,उजाड़कर सोता है। काटता है-जलाता है,दूर बड़ा घर बनाता है, हमें मार-भगा,हमारे वन को,अपना बताता है। हम बेघर हो भटकते हैं,ओ तो लूट-पाटकर खाता है, खोद-खोद कर धरती माँ को,खोखला करता जाता है। निज … Read more

पेट की आग

अलका जैन इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** पेट रोटी मांगता रहा जिस्म पसीना बहाता रहा, हर मुफलिस की यही एक कहानी दोस्त उम्र तो खेलने-कूदने की थी,बचपन था, पेट की आग मगर काम करवाती रही। पराई औलाद पर किसी को दया नहीं आती, काम बहुत और टका कम देता रहा साहूकार आइना देखने का वक्त ना मिला, खूबसूरती … Read more

उपहार

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* ईश्वर ने जब इंसान को भेजा, धरती पर तो दिए अनन्त उपहार। ये धरती को स्वर्ग बनायेगा, और करेगा उसे भरपूर प्यार। उसने भी धरती को स्वर्ग बनाया, और बच्चों को दिए अच्छे संस्कार। जंगलों को तो हरा-भरा किया, सभी को दिया हवा-पानी उपहार। समय बीतते मानव भी देखो, … Read more

सभी औरतें दलित हैं

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** “संसार की सभी औरतें दलित हैं” कमला कहाँ है ? ढूँढो! मिलेगी कहीं कीचड़ में, गाँव के बाहर कहीं निर्जन में समेटती, अपने लिए थोड़ी-सी छाँवl नहीं हो सकती लक्ष्मी को समर्पित, नहीं मेट सकती अपना दलिदर उसकी दलक बहुत है गहरीl रात की थाली में निश-दिन है … Read more

मातृभूमि…तेरे चरणों में वंदन

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** भारतमाता भाग्य विधाता,तेरे चरणों में वंदन है, तेरी कर्ज चुका न पाऊं,मेरा सादर अभिनन्दन है। रज कण में खेले कूदे,इस मिट्टी की सौगंध है, हम पर दया कर माँ,तेरे चरणों में अभिनंदन हैl इस मिट्टी में जन्म लिया,हम आपके पुत्र-पुत्री हैं, हम सबकी माता आप,तेरे चरणों में अर्पण है। … Read more