साँवला कान्हा

प्रभावती श.शाखापुरे दांडेली(कर्नाटक) ************************************************ बैरी साँवलिया ना छोड़े। फागुन बहार आज॥ मधुर तान सुन मुरली की,रे! लागे मोहे लाज॥ श्याम साँवला,राधा गोरी। जैसे चाँद-चकोर॥ संग कन्हैया,नाचे राधा। होकर प्रेम विभोर॥ प्रेम पियूष पिला कर कान्हा। जता प्रेम की रीत॥ मोर मुकुट गिरिवरधारी ने। सिखा दी प्रेम प्रीत॥ परिचय-प्रभावति श.शाखापुरे की जन्म तारीख २१ जनवरी एवं जन्म … Read more

नव वर्ष

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* (रचना शिल्प:विधान-११२१२ ११२१२ ११,२१२ ११२१२ १६,१२ मात्रा पर यति,चार चरणों का एक छंद,चारों चरण सम तुकांत) लगि चैत माह मने नया सन, सम्वती मय हर्ष है। फसले पकें खलिहान हो, तब ही सखे नव वर्ष है। परिणाम की,जब आस में बटु, धारता उतकर्ष है। मम कामना मनभावना यह, पर्व हो प्रतिवर्ष … Read more

खोज रहा नीर नेह

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* (रचना शिल्प:विधान- २२ मात्रिक छंद-१२,१० मात्रा पर यति, यति से पूर्व व पश्चात त्रिकल अनिवार्य, चरणांत में गुरु (२),दो-दो चरण समतुकांत हों, चार चरण का एक छंद कहलाता है)  वरुण देव कृपा करे,जल भंडार भरें। जल से सब जीव बने,जल अंबार करें। दोहन मनुज ने किया,रहा जल बीत है। बिन अंबु … Read more

इम्तहान

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* ये जीवन है इक इम्तहान, सबको देना पड़ता है। जो जीता जीवन सोच-समझ, वही सफलता पाता हैll जीवन के इस इम्तहान में, माहिर भी धोखा खा जाते। चक्रव्यूह में इस जीवन के, अच्छे-अच्छे फँस जातेll जीवन की कठिन परीक्षा में, नहीं हौंसला खोता है। जो जीवन में रखता हिम्मत, वही … Read more

फागुन

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** फागुन आया मस्ती लाया,रंग गुलाल उड़ाये। बाग-बगीचा सुंदर दिखते,भौंरा गाना गाये॥ पीले-पीले सरसों फूले,खेतों में लहराये। सोने जैसे गेहूँ बाली,सबके मन को भाये॥ खुश होकर के नाचे गोरी,आँचल को लहराये। बाग-बगीचा सुंदर दिखते,भौंरा गाना गाये॥ ढोल-नगाड़ा बाज रहे हैं,फाग गीत सब गाये। बच्चे-बूढ़े सभी जनों ने,मिलकर शोर मचाये॥ … Read more

रंग ले के आयी होली

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** रंग ले के आयी होली,अँखियों से मारे गोली। गोरियों की भींगे चोली,रंग की फुहार में। जिसका भी देखो गाल,रंग से रँगा है लाल। टोली में जवान बाल,पागल है प्यार में। गमक हवाएँ उठी,महक फिजाएँ उठी। दिल में वफ़ाएं उठी,बसंत बहार में। मन ने उड़ान भरी,आफत में जान पड़ी। सबने … Read more

श्याम की दीवानी हुई

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- (रचना शिल्प: वार्णिक छंद ८८८७-३१) श्याम की दीवानी हुई, प्रेम की कहानी हुई, पैरों में घुँघरू बाँध, नाचती ही जाये है। कान्हा जाये मिल गर, फिर नहीं कोई डर, मेवाड़ की राणी मीरा, जोगन हो जाये है। बाँसुरी की धुन पे वो, बावरी-सी झूम उठे, हाथ खड़ताल लिये, साँवरा … Read more

उनकी होली की शान

श्रीमती पुष्पा शर्मा ‘कुसुम’ अजमेर(राजस्थान) **************************************************** याद रहे,उनकी होली की शान, देशहित हो गये जो बलिदान। कितने वादे,कितनी खुशियाँ ? कितने नाते,कितनी कमियाँ ? कितने! अधूरे रह गये अरमान। देश हित…॥ सेवा जननी और जनक की, वचन भगिनी रक्षा संगिनी की बिखरा,बच्चों सिर तना वितान। देशहित…॥ सरहद की रक्षा प्रण ठाने, मातृभूमि बलिवेदी माने। निछावर … Read more

होली का हुड़दंग

छगन लाल गर्ग “विज्ञ” आबू रोड (राजस्थान) **************************************************************************** नशे में नैन कजरारे,कहें होली सुहानी हैंl बड़ी इठला रही देखो,अभी निखरी जवानी हैंl चलो रंगीन हो जाये,मजे में चूर हो जायेl घुली है भांग ठंडे में,जरा मदहोश हो जायेll अभी खामोश पिचकारी,भरी बंदूक-सी लागेl जरा से पास आओ ना,हमारी धड़कनें जागेl जमाना भांग का आया,नशे में … Read more

होली

हरिशंकर पाटीदार ‘रंगीला’ देवास(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** बसन्त बहार आयी रंगों की फुहार छायी होली का त्यौहार आज मिल के मनाएंगे। मन में उमंग भर हर हाथ रंग धर अपनों के संग-संग खुद भी रंगाएंगे। जाति-पांति छोड़कर भेद-भाव तोड़कर सबको गले से लगा प्रेम को बढ़ाएंगे। आधुनिक रंग छोड़ प्राकृतिक फूल तोड़ केसरिया रंग डाल शरीर बचाएंगे। … Read more