पानी..जीवन आधार
डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* नदियाँ सागर रीतते, रीते ताल तड़ाग।ताप धरा का बढ़ रहा, सूख रहे वन बाग॥ पानी बिन सब सून है, ये जीवन आधार।तड़प रहे हैं जीव सब, मिले मेह की धार॥ पानी आँखों में नहीं, मिटे सभी संस्कार।सूखा पानी मनुज का, पड़े प्रकृति की मार॥ आस बची अब मेघ से, बरसाए जल … Read more