विनती
प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ विनती करती मैं सदा,जोड़ूँ दोनों हाथ।विद्या दो माँ शारदे,चरण झुकाऊँ माथ॥ विनती मेरी आपसे,मुझको दो वरदान।मैं छोटी-सी लेखिका,मिले कलम को मान॥ जय माँ वीणा वादिनी,स्वप्न करो साकार।आयी हूँ मैं द्वार पर,कर दो बेड़ा पार॥ सत्य राह पर मैं चलूँ,सिर पर रखना हाथ।भूल-चूक माफी मिले,रहना मेरे साथ॥ चले कलम मेरी … Read more