वर्तमान में नैतिकता की बहुत आवश्यकता

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)************************************** यह संतोष और गर्व की बात है कि देश वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षेत्र में आशातीत प्रगति कर रहा है। विश्व के समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देशों से टक्कर ले रहा है और उनसे आगे निकल जाना चाहता है, किंतु प्रगति के इस उजले पहलू के साथ एक धुंधला पहलू भी है,जिससे हम छुटकारा चाहते … Read more

संग्रह का निहित स्वार्थ छोड़ना होगा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ********************************** आज संसार में मानवीय मृगतृष्णा सागरवत मुखाकृति को अनवरत धारण करती जा रही है। एतदर्थ मनुष्य साम,दाम,दंड,भेद,छल,प्रपंच, धोखा,झूठ,ईर्ष्या,द्वेष,लूट,घूस,दंगा,हिंसा,घृणा और दुष्कर्म आदि सभी भौतिक सुखार्थ आधानों को अपना रहे हैं। सतत् प्राकृतिक संसाधनों, जैसे-भूमि खनन,वन सम्पदा का कर्तनt,पहाड़ों को काटना,नदियों का खनन एवं समुद्रों को भी प्रदूषित करने से मनुष्य … Read more

आचार्य द्विवेदी का संपूर्ण साहित्य मानव की प्रतिष्ठा का प्रयास

डॉ. दयानंद तिवारीमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ जिसमें सारे मानव सभ्यता को सुंदर बनाने की कल्पना की जाती है,उसे ही तो साहित्य कहते हैं। साहित्य की हर महान कृति अपनी ऐतिहासिक सीमाओं का अतिक्रमण करने की क्षमता रखती है। अपनी संस्कृति के स्मृति संकेतों,मिथकों और भाषाई प्रत्यय से गुजरते हुए हर कविता,हर निबंध,हर उपन्यास मनुष्य के समग्र और … Read more

अनंत ज्ञान के धनी थे आदि शंकराचार्यजी

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** केरल के मालाबार में कालड़ी नामक स्थान पर साधारण ब्राह्मण परिवार मेंं वैशाख माह की शुक्ल पंचमी के दिन जन्मे अद्वैत वेदांत के प्रणेता आदि गुरु शंकराचार्य जी संस्कृत के उद्भट प्रस्तोता, उपनिषदों की व्याख्या करने वाले,महान दार्शनिक व सनातन धर्म के सुधारक थे। बहुत मुश्किल से उनको अपनी माताजी से … Read more

परिवार बिना जीवन की कल्पना कठिन

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)************************************* परिवार एक ऐसी सामाजिक संस्था है,जो आपसी सहयोग व समन्वय से क्रियान्वित होती है और जिसके समस्त सदस्य आपस में मिलकर अपना जीवन प्रेम, स्नेह एवं भाईचारेपूर्वक निर्वाह करते हैं। संस्कार,मर्यादा,सम्मान,समर्पण,आदर, अनुशासन आदि किसी भी सुखी-सम्पन्न एवं खुशहाल परिवार के गुण होते हैं। कोई भी व्यक्ति परिवार में ही जन्म लेता है,उसी से … Read more

प्रकृति प्रदत्त संस्थान है ‘घर-परिवार’

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ घर-परिवार स्पर्धा विशेष…… संसार की रचना में मनुष्य को परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ रचना माना गया है। मनुष्य ने अपनी श्रेष्ठता को साबित भी किया है,परन्तु मनुष्य अकेला नहीं,एक परिवार के रूप में माता-पिता के साथ आता है और माता की कोख उसका प्रथम घर होती है। इस प्रकार प्रकृति स्वयं घर-परिवार की रचना … Read more

कोरोना: तीसरा हमला,मुकाबला करना होगा

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* अमेरिका-जैसे कुछ देशों में लोग मुखपट्टी लगाए बिना इस मस्ती में घूम रहे हैं,जैसे कि ‘कोरोना’ की महामारी खत्म हो चुकी है। उन्होंने २ टीके क्या लगवा लिए,वे सोचते हैं कि अब उन्हें कोई खतरा नहीं है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सारी दुनिया को अभी से चेता दिया है। उनका कहना … Read more

घर-परिवार:ज़रूरत बदले हुए नज़रिए की

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* घर-परिवार स्पर्धा विशेष…… ‘ज़िंदगी मेरे घर आना,आना ज़िंदगी,मेरे घर का सीधा-सा इतना पता है,मेरे घर के आगे मुहब्बत लिखा है,न दस्तक ज़रूरी,ना आवाज देना,मैं साँसों की रफ़्तार से जान लूँगी,हवाओं की खुशबू से पहचान लूँगी।…’कहने का तात्पर्य है-‘जो सुख छज्जू के चौबारे, ओ बल्ख न बुखारे’ इस उक्ति का अर्थ है … Read more

घर-परिवार एवं हमारा दायित्व- एक चिंतन

नमिता घोषबिलासपुर (छत्तीसगढ़)**************************************** घर-परिवार स्पर्धा विशेष…… बचपन जीवन की मुख्य अवस्था है। इसे बहुत ही जतन और स्नेह की आवश्यकता होती है,लेकिन वर्तमान समय में बचपन की उम्र घटने लगी है। बचपन से ही बे-मेल विचारों की बाढ़ आने लगी है, अब बचपन से ही बच्चे असमय ही परिपक्व होने लगे हैं। बचपन पर यह … Read more

अपना-अपना घोंसला

डॉ.अर्चना मिश्रा शुक्लाकानपुर (उत्तरप्रदेश)*************************************** घर-परिवार स्पर्धा विशेष…… गाय भी रंभाती हुई अपने बच्चों पर ममता और प्यार लुटाने को खूँटे तक पहुँचती है,चिड़िया भी घोंसला बनाती है और बच्चों के लिए खाना-पानी जुटाती है। जंगल का राजा शेर भी विश्राम हेतु म्यांद बनाता है,न जाने कितने पशु-पक्षी अपने लिए खोह और बिल बनाते हैं यानी … Read more