बजट अच्छा,लेकिन क्रांतिकारी नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* देश का वह बजट आदर्श बजट होगा,जो देश के सभी १४० करोड़ लोगों के लिए रोटी,कपड़ा,मकान,शिक्षा और चिकित्सा की न्यूनतम व्यवस्था तो करे। राष्ट्र को परिवार बना दे। इस कसौटी पर किसी भी बजट का खरा उतरना तभी संभव है,जबकि देश के शीर्ष नेताओं के दिल में ऐसा प्रबल संकल्प हो और … Read more

किस राष्ट्रचेतना की बात करते हैं हम ?

श्रीमती लीना मेहंदलेगोवा**************************** राष्ट्रचेतना का उदय राष्ट्र के चिंतन से होता है! राष्ट्र चिंतन होता है राष्ट्र के दर्शन या तत्वज्ञान से,लेकिन भारत के विद्वान शिक्षाविद पंडित लोग यह सोचते हैं कि भारत देश के पास अपना कहने लायक कोई तत्वदर्शन नहीं है! जिसे बात पर विश्वास ना हो,वह संघ लोक सेवा आयोग से पूछे। … Read more

सत्यान्वेषी ध्यानप्रेमी स्वामी जी

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************* स्वामी विवेकानन्द जी जैसे निराले व्यक्तित्व को प्रणाम एवं श्रद्धाजंली अर्पण। स्वामी जी के जीवनादर्श एवं चरित्र पर विभिन्न तथ्यादि से पता लगता है कि,गम्भीर ध्यान से ही समझदार मन तैयार होता है। अटल,शुद्ध,स्वाधीन विचार युक्त मन के अधिकारी स्वामीजी तो जन्मजात ‘ध्यानप्रेमी’ थे। उनके जीवन की कहानी को विश्लेषण करने … Read more

मन जीतने में कामयाब हुई सरकार

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** अंकीय भारत (डिजिटल) के पहले अंकीय बजट में जो भी घोषणाएं हुई हैं,उसके चलते शेयर बाजार में बम-बम, सेंसेक्स-निफ्टी में पहले कभी बजट के दिन इतनी महा तेजी नहीं दिखी। आम जनता को इस बजट में पसन्द आने वाले प्रावधान ज्यादा और निराश करने वाले बहुत कम हैं।अब चर्चा कर लेते … Read more

मातृभाषाओं को रोज़गार से जोड़ने वाले पहले वैज्ञानिक

डॉ. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)************************************* हिन्दी योद्धा:दौलत सिंह कोठारी(४ फरवरी पुण्यतिथि विशेष)… आजादी के बाद जब १९५० में संघ लोक सेवा आयोग की पहली बार परीक्षा हुई तो उसमें ३६४७ अभ्यर्थी शामिल हुए थे,जिनमें से २४० उत्तीर्ण हुए। १९७० में ११७१० बैठे थे और १९७९ में यह संख्या बढ़कर १ लाख से ऊपर हो गई। इस … Read more

मातृभाषा और बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा में भारतीय भाषाओं का महत्व

राहुल देवदिल्ली**************************** राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२०….. किसी व्यक्ति के जीवन में उसकी मातृभाषा के महत्व की सबसे अच्छी और सटीक तुलना करने के लिए माँ के दूध से बेहतर कुछ नहीं। जैसे जन्म के एक या दो वर्ष तक बच्चे के शारीरिक और भावनात्मक विकास के लिए माँ का दूध और स्पर्श सर्वश्रेष्ठ होते हैं,वैसे … Read more

काबुलःबाइडन जल्दबाजी न करें

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* अमेरिका का बाइडन प्रशासन डोनाल्ड ट्रम्प की अफगान-नीति पर अब पुनर्विचार करने वाला है। वैसे तो ट्रम्प प्रशासन ने पिछले साल फरवरी में तालिबान के साथ जो समझौता किया था,उसकी प्रशंसा सर्वत्र हो रही थी लेकिन उस वक्त भी संदेह प्रकट किया गया था कि इस समझौते का सफल होना कठिन है। … Read more

राष्ट्रप्रेम और साहित्यकारों की महती भूमिका

डॉ.अर्चना मिश्रा शुक्लाकानपुर (उत्तरप्रदेश)************************* हम सब यह तो जानते ही हैं कि हमारे देश में अनेकानेक वीरों ने अपना बलिदान देकर अपने देश को अंगेजों से देश को मुक्त कराया। स्वतंत्रता आन्दोलन में कुछ रचनाकार चिरपरिचित हैं,जिन्हें हम लोग जानते हैं,पर उसमें हजारों ऐसे भी हैं, जिनका नाम भी हम नहीं जानते। जो इस देश … Read more

व्यवहार का ज्ञान-आचरण है हिन्दी

मदन गोपाल शाक्य ‘प्रकाश’फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश)************************************** हिंदी भाषा हमें ज्ञान विवेक और भावपूर्ण आचरण व्यवहार का ज्ञान कराती है। हिंदी भाषा के ग्रंथों में ज्ञान की शिरोमणि अगणित लुकी-छुपी सी स्पष्ट नजर आती है,जो हिंदी भाषा को पढ़ता है,वही इन तथ्यों का अर्थ समझ सकता है।हिंदी भाषा हमेशा सभी भाषाओं से अलग पहचान बनाने वाली … Read more

उच्च विचारों का अवमूल्यन रोकना होगा

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** आज तक हमने सुना है,पढ़ा है,या कहा है कि-रुपए में गिरावट आई,डॉलर-यूरो की कीमत बढ़ गई है, दिरम के भाव बढ़ गए हैं। जिस देश की जो भी मुद्रा है,उसके साथ हम अपने रुपए को जोड़ते हैं,तुलना करते हैं एवं अपने रुपए का मूल्यांकन करते हैं।१९४७ में भारत की आजादी … Read more