प्रकृति संरक्षक व दिव्यज्ञान के प्रतीक श्री गणेश जी

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ********************************************************** श्री गणेश चतुर्थी स्पर्धा विशेष….. ईश्वर निराकार है। एक होकर भी उसने अनेक रूप धारण किए। स्वयं भगवान कहते हैं,-‘एकोऽहं बहुस्याम’,अर्थात में एक होकर भी अनेक रूप धारण करता हूँ। संसार में विभिन्न लीलाएं रचने,संसार को मार्गदर्शन देने,संसार में सभी प्रकार की मर्यादाएं व व्यवस्थाएं बनाने,भक्तों को विभिन्न रूपों में दर्शन … Read more

कोरोना:विकास के संतुलन पर गंभीरता से सोचना होगा

आशा आजादकोरबा (छत्तीसगढ़) ****************************************************** ‘कोरोना’ विषाणु से पैदा हुई महामारी ने वैश्विक समाज और प्रशासन की तमाम कमजोरियों को उजागर कर दिया है,साथ ही इस खतरनाक संकट से आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखाया है। कोविड-१९ की यह खतरनाक बीमारी जो असमय ही मनुष्य जीवन पर हावी हो गई है,ऐसा संकट है जो मनुष्य जाति … Read more

बूढ़ों का देश कहलाएगा भारत सिर्फ १६ साल बाद!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** आजादी की वर्षगांठ पर स्वतंत्रता की खुशियों के साथ-साथ एक बड़ा और चिंताजनक सवाल भी दस्तक दे रहा है कि,एक तरफ हम अपनी युवा आबादी को काम नहीं दे पा रहे हैं,दूसरी तरफ भारत धीरे-धीरे बूढ़ों के देश में तब्दील होने जा रहा है। यह कोई दूर की कौड़ी नहीं है,केवल १६ … Read more

गणेश जी की संरचना में छुपा है बड़ा अर्थ

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* श्री गणेश चतुर्थी स्पर्धा विशेष….. भगवान गणेश के ४ हाथ,४ दिशाओं के प्रतीक हैं,जिसका मतलब है कि ईश्वर सर्वव्यापक हैं I संसार में जो कुछ भी घटित हो रहा है,भगवान उससे अनभिज्ञ नहीं हैं I भगवान गणेश के बड़े-बड़े कान हमें यह सीख देते हैं कि जीवन में अधिक से अधिक … Read more

राशिनी में भी मातृभाषा माध्यम के गले में जहां संभव हो का फन्दा

वैश्विक ई-संगोष्ठी भाग-३:नई शिक्षा नीति से शिक्षा के माध्यम में परिवर्तन…? जोगा सिंह विर्क(पंजाब)- राहुल खटे(महाराष्ट्र)- डॉ. अशोक कुमार तिवारी- (सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई)

नई शिक्षा नीति से शिक्षा के माध्यम में परिवर्तन…?

वैश्विक ई-संगोष्ठी भाग-२………. डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य'(महाराष्ट्र)- यह एक सार्वभौमिक सत्य है कि,मातृभाषा में शिक्षा बच्चों के स्वाभाविक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। विश्व के सभी विकसित देशों के बच्चे अपनी मातृभाषा में ही पढ़ते हैं और वहाँ सभी कार्य भी उनकी भाषा में ही होते हैं। इसलिए विकास की गति में भी वे … Read more

बेटियां हकदार,लेकिन मुश्किलें

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** सर्वोच्च न्यायालय के ताजा फैसले ने देश की बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में बराबरी का हकदार बना दिया है। अदालत के पुराने फैसले रद्द हो गए हैं,जिनमें कई किंतु-परंतु लगाकर बेटियों को अपनी पैतृक संपत्ति का अधिकार दिया गया था। मिताक्षरा पद्धति या हिंदू कानून में यह माना जाता है … Read more

विश्वभर के लिए आत्मा की उपासना का उत्कृष्ट पर्व ‘पर्यूषण’

आचार्य डाॅ. लोकेशमुनिनई दिल्ली(भारत) *********************************************************************** पर्यूषण महापर्व १५-२२ अगस्त विशेष…. जैन संस्कृति में जितने भी पर्व व त्योहार मनाए जाते हैं,लगभग सभी में तप एवं साधना का विशेष महत्व है। जैनों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है पर्यूषण पर्व। यह पर्व ग्रंथियों को खोलने की सीख देता है और आत्मशुद्धि का वातावरण निर्मित करता है। इस … Read more

हम कितने स्वतंत्र

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’बहादुरगढ़(हरियाणा)*********************************************************************** स्वतंत्रता दिवस विशेष …….. अब हमें ७४वें स्वतंत्रता दिवस पर इस बात का गहनता से विचार करना है कि आज तक कितना स्वरूप बदला,बदला भी है,तो दिशा सकारात्मक है क्या ? इतनी अधिक जनसंख्या औऱ विविधता से भरे राष्ट्र में सबको साथ ले कर चलना,बराबर मान-सम्मान देना,किसी की भावनाओं को ठेस न … Read more

‘पराधीनता’ अभिशाप,तो ‘स्वाधीनता’ वरदान

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* स्वतंत्रता दिवस विशेष …….. ‘पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं’-इस उक्ति का अर्थ होता है कि पराधीन व्यक्ति कभी भी सुख को अनुभव नहीं कर सकता है। सुख पराधीन और परावलंबी लोगों के लिए नहीं बना है। पराधीनता एक तरह का अभिशाप होता है। मनुष्य तो बहुत दूर,पशु-पक्षी भी पराधीनता में छटपटाने लगते … Read more