चीन:इस दर्द की दवा क्या है ?

राकेश सैनजालंधर(पंजाब)***************************************************************** रूस में साम्यवाद के अंत के बाद दुनिया ने कितनी राहत की साँस ली,उसकी कल्पना वही पीढ़ी कर सकती है जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में चार दशकों तक चले शीतयुद्ध में रूसी खेमे और अमेरिकी खेमे की तनातनी को झेला। रूसी साम्यवाद के पतन में आंतरिक परिस्थितियां तो जिम्मेवार थी … Read more

हमारे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ राष्ट्रीय समस्या

कर्नल डॉ. गिरिजेश सक्सेना ‘गिरीश’भोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************************************** भारत एक सार्वभौम संवैधानिक लोकतंत्र है और भारतीय लोकतंत्र के तीन संवैधानिक स्तम्भ हैं,यथा-विधायिका,कार्यपालिका एवं न्याय पालिका,जिनके संगठन,कार्य,कार्यपद्धति संविधान में निहित है| ,प्रबुद्ध भारत एवं उद्बोध,इंडियन ओपीनियन(महात्मा गाँधी)सहित वंदे मातरम आदि उस समय के मुखर पत्र-पत्रिका थे,जिनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को ना कोई नकार सकता है,न भूल सकता हैl … Read more

अब नई दुनिया गढ़े भारत

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** भारत ८ साल बाद फिर आठवीं बार सुरक्षा परिषद का सदस्य चुन लिया गया है। यह सदस्यता २ साल की होती है। सुरक्षा परिषद में कुल १५ सदस्य हैं। उनमें से ५-अमेरिका, रुस,चीन,ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं। इनमें से प्रत्येक को ‘निषेधाधिकार'(वीटो) का अधिकार है। शेष १० अस्थायी सदस्य किसी भी … Read more

मानसिक संघर्ष और नारी

अंशु प्रजापतिपौड़ी गढ़वाल(उत्तराखण्ड)**************************************************************** ‘कोरोना’ महामारी के चलते एक स्व प्रेरित वेबिनार हमारे कुछ शिक्षक बंधुओं के माध्यम से आयोजित की गई,जिसमें मुझे प्रतिभाग का सुअवसर प्राप्त हुआ ।प्रतिदिन नए विषय पर चर्चा होनी थी,जिसमें एक दिन निर्धारित था जीवन और आध्यात्म के लिए। उस दिन जो चर्चा हुई,वो वास्तव में अदभुत थी। आयोजकों और प्रतिभागियों … Read more

ग्रहों का असर-हमारे जीवन पर

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* कहा जाता है कि ग्रह,नक्षत्र और राशि हमारे जीवन पर और प्रकृति पर भी असर डालते हैं। तब प्रश्न यह उठता है कि बहुत दूर पर स्थित ग्रह-नक्षत्र कैसे हमारे जीवन पर असर डालते हैं। अति व्यग्रता से हम सुबह अखबार का इंतजार करते हैं और आ जाने पर … Read more

कोरोना से बढ़ी योग की स्वीकार्यता

ललित गर्गदिल्ली ******************************************************************* अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस २१ जून विशेष भारतीय योग एवं ध्यान के माध्यम से भारत दुनिया में गुरु का दर्जा एवं एक अनूठी पहचान हासिल करने में सफल हो रहा है। इसीलिए,समूची दुनिया के लिए अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस स्वीकार्य हुआ है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सूझ-बूझ एवं प्रयासों से अपूर्व वातावरण … Read more

सामूहिक प्रतिरोधकता के भरोसे तो पूरा भारत कोरोनामय हो जाएगा

प्रियंका सौरभहिसार(हरियाणा) ********************************************************** भारत में जैसे-जैसे कोरोना का प्रसार तेज हो रहा है,तो सामूहिक प्रतिरोधकता(हर्ड इम्यूनिटी) को लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है। यानी अगर लगभग ७०-९० फीसद लोगों में बीमारी के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाए,तो बाकी भी बच जाएंगे, लेकिन इसके लिए टीका(वैक्सीन)जरूरी है। क्या कोरोना के वैक्सीन की अनुपलब्धता में … Read more

मैं मज़दूर बोल रहा हूँ…

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)***************************************************************** आज चारों ओर मेरे ही नाम का शोर है,मेरे प्रति शाब्दिक संवेदनशीलता सोशल मीडिया पर गूँज रही है,सिर्फ मोबाइल की काला पर्दा ही नहीं,आपके घरों दीवारों पर लटका काला पर्दा भी आजकल मेरे पैरों के छाले दिखा रहा है…ट्राली बैग पर लेटे मेरे बच्चे को मेरी बीवी लंगड़ाते हुए खींचे चली … Read more

विकास का आधार स्तंभ प्रवासी श्रमिकों का पलायन

रचना सिंह ‘रश्मि’ आगरा(उत्तरप्रदेश)************************************************************ ‘कोरोना’ का कहर पूरे विश्व में छाया है, जिसके फैलाव को रोकने के लिए सरकार ने सम्पूर्ण भारत में तालाबंदी की,जिससें पूरा देश थम गया है। सभी गतिविधियां बंद है। हवाई,रेलवें,सड़क यातायात बंद है। शहरों व गाँवों की सड़कें और गलियां सूनी हैं। जो जहाँ है,वो वही ठहर गया है। सरकार … Read more

कोरोना:जीना-मरना,दोनों मुहाल

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** ‘कोरोना’ का संकट भी क्या गजब का संकट है। इसने लोगों का जीना और मरना,दोनों मुहाल कर दिए हैं। दुनिया के दूसरे मुल्कों के मुकाबले भारत में कोरोना बहुत वीभत्स नहीं हुआ है लेकिन इन दिनों जिस रफ्तार से वह बढ़ा चला जा रहा है,वह किसी भी सरकार के होश फाख्ता करने … Read more