गौरी
सुदामा दुबे सीहोर(मध्यप्रदेश) ******************************************* छन-छन छनकायेंं पायलियाँ पाँव में, गौरी आई गुलमोहर की छाँव में। लगे नैन उसके काजल से कजरारे, झूमे अल्हड़ कैश पवन के दाब में। सोहें तन उसके सिंदूरी से बाने, दमके अधर गुलाबी रवि के ताव में। यौवन मद में चूर रूपसी मतवारी, छेड़े मिलन का राग हिये के भाव में। … Read more