मन में बसा कर
हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ मैं बढ़ रहा,आगे लक्ष्य पर निशानासाधते हुए मैं बढ़ रहा,गुरु की मूरत मन बसा कर। मैं इतना बड़ा नहीं,मैं दीन-हीन कैसे शिक्षा ग्रहण करूँ ?पर कोशिश तो करना पड़ती है,इसलिए गुरु की मूरत मन में बसा कर मैं बढ़ रहा। मन की एकाग्रता को लिए,मुझे गुरु कभी-न-कभी जरूर मिलेंगेतभी तो … Read more