आओ फिर से प्रेम की डोर में
डॉ. रचना पांडेभिलाई(छत्तीसगढ़)*********************************************** रिश्तों से प्रेम कहाँ गया ?वो प्यार भरे लम्हे कहाँ,जो हँसी के फूल खिलते थे…अब वो मुस्कान कहाँ ? हर रिश्ता दिखता है खोखला,प्यार की जगह दिखावा हैअपनों के दिल दूर होते जा रहे,और हम अनजाने हो रहे। समय की भाग-दौड़ में हम,भूल गए अपनों को यादपहले दिल से जीते थे हम,अब … Read more