हाय! गरमी प्रचंड
सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** गरमी तेज़ प्रचंड हुई,किल्लत पय चहुं हुईपसीने से तर-बतर हो,ज़िंदगी दुश्वार हुई। लू बैरिन प्रचंड दहाड़,गर्मी विकट सताए हुएपसीना उभर-टपक रहा,धरती हाय! तौबा हुए। बड़ी मुश्किल आन पड़ी,होती है गुल बिजलीचल रही पंखी अहरनिश,ऋतु हठी तीक्ष्ण चली। शीतल पेय सदा भाता,रहती तकरार सदातृप्तिदायक हैं ये सभी,त्राण-प्राण पुष्ट सदा। ये गर्मी … Read more