बोझा ढोते बुजुर्ग
संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** अकेले पानी लाने काबोझा ढोते,जबकि इस उम्र मेंसहारे की जरूरत होती। मजबूर पिता को ही,सब काम करना होताबेटों को तो काम करने मेंशर्म महसूस होती। आधुनिक परिवेश की छाया नेउन्हें घेर लिया हैउन्हें ये समझना होगा किबुजुर्ग हैं तो रिश्ते हैं,नाम है, पहचान हैअगर बुजुर्ग नहीं तो,बच्चों की कहानियाँ बेजान है। … Read more