सैनिक हूँ

पी.यादव ‘ओज’झारसुगुड़ा (ओडिशा)********************************************** संकल्प हूँ, उद्घोष हूँ,निज भाव लिए मदहोश हूँनिर्माण हूँ, आह्वान हूँ,राष्ट्र-गौरव की पहचान हूँ।एक में भी, मैं हजार हूँ,मैं सैनिक हूँ, मैं सैनिक हूँ…॥ वतन का हूँ, मैं प्रहरी,सीमा की, मैं ढाल हूँरण पे गूंजे मेरी गाथा,शत्रुओं का, मैं काल हूँ।एक में भी, मैं हजार हूँ,मैं सैनिक हूँ, मैं सैनिक हूँ…॥ चाहे … Read more

शिव प्रेम चंद्रकला बढ़ता जाए

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** शिव प्रेम चंद्रकला बढ़ता जाए।कभी इसकी पूर्णिमा न आए॥मन डूबे ऐसे शिव के चिंतन में,कोई चिंतन निकट आ न पाए॥ मैं, हूँ तड़पती प्रभु जी लगन में,आत्मा बेचैन तन-मन भवन में।शिव नाम भव नौका बन जाए,मुझ पापी को पार लगाए॥शिव प्रेम चंद्रकला… भगवन् कृपा हुई मन में लौ लागी,पुण्य … Read more

हम और वो-एक बाड़ के आर-पार

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** बो दिए हैं हमने,हम और वो के बीजकाँटेदार झाड़ियाँ,लोहे की बाड़समानांतर सोचों की ऊँची फेंसिंग-धीरे-धीरे वो ऊँचाई पा गई है,जिससे अब कोई देख न सके आर-पार। उधर बड़े हो गए हैं ‘वो’,इधर हम भी बड़े ‘हम’ बनते जा रहे हैंअब दोनों को अलग-अलग खूंटों से बांधकर,वैचारिक चारा खिलाया जा रहा … Read more

मुख पर पहरा था

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* फूलों के चेहरे उतरे थेपत्तों के गुमसुम तेवर थे,कंपित से खड़े चिनार थेखफ़ा मानव से देवदार थे,मौसम में स्याह वीरानी थीक्या चाल कोई चली जानी थी ?? अनहोनी का गंदा खेल रचाआतंक मन में हर्षाया था,ये किसने खेल बिछाया थाजिसे जान समय थर्राया था,धुआँ आलम कहता-सा लगापर उसके मुख पर पहरा … Read more

भुला दिया तुमने

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** भुला दिया तुमने ज़ख्म ऐसा दिया तुमने,क्या कुसूर था मेरा जो दगा दिया तुमने। खता की थी तुमने और सजा दी मुझको,यह कैसा है इंसाफ भला किया तुमने। कुछ करते और कहते राज़े-दिल दबा हुआ,हर राज को दबा कर क्यों बुरा किया तुमने। मोहब्बत की दस्तक थी ‘शाहीन’ आवाज की,असर … Read more

जल रही धरा

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** जल रही धरा यहाँ,जल रहा है आसमाँताप का प्रकोप ये,दिखा रहा अलग जहाँ। वर्ष-वर्ष बढ़ रही,सोख पानी सब रहीकाट-काट पेड़ सब,हरीतिमा को हर रही। यह मानव का प्रयास है,जो नाशवान आज हैप्रकृति के साथ खेल ये,डरावना भविष्य है। चलो सभी सचेत हो,इधर ही सबका ध्यान हो।लगाओ नित्य वृक्ष एक,यह कार्य अनिवार्य हो॥

क्या बतलाएं यार!

जी.एल. जैनजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* एक पागल केस्वस्थ्य होने पर,परीक्षक नेपरीक्षण के तौर पर,किए कुछ सवालताकि पता लग जाएकैसा है मरीज़ का हाल! परीक्षक नेचर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा-आप तोकाफी समझदार,नगर के जाने-मानेप्रसिद्ध नेता हैंफिर कैसे आ गएइस लपेटे में ?आखिर कौन-सी ऐसी बात थी,जिसके कारणआपका संतुलन खो गया!आपका दिमाग अपसेट हो गया! तब नेता जी … Read more

श्रृंगारित इमली

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* सघन मेघ का गगन देख फूला न समाई सारी इमलियाँ,कंकाल बदन पर पल्लव छाए मनाने लगी अब रंगरलियाँवस्त्र बेशकीमती ओढ़ बदन पर सज्जित हुई गली-गलियाँ,बांध दिए गजरे-गजरे गगन ने पुलकित हो आयी इमलियाँ इमलियों के बदन बदन पर उतर आयी लाखों कली-कलियाँ,कैसी नाजुक, कितनी कोमल लहराने लगी है डाली-डालियाँनीलगगन से चूम … Read more

आखिर में मैं जीत ही गया

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** आखिर में मैं जीत ही गया, ये बात मैं जानता हूँ,सच्चाई का रास्ता हमेशा कठिन होता है, ये मैं जानता हूँ। आखिर में, मैं जीत गया, क्योंकि मेरी ज़िद थी,संघर्ष के बाद ही सफलता मिलती है, ये मैं जानता हूँ। आखिर में, मैं जीत गया, क्योंकि मैंने हार नहीं मानी,हर चुनौती … Read more

लाल गुलाब की अभिलाषा

मंजू अशोक राजाभोजभंडारा (महाराष्ट्र)******************************************* लाल गुलाब से एक दिन मैं यूँ ही पूछ बैठी,आखिर क्या हमसे है रहती, तुम्हारी अभिलाषा ? वह मुझसे कहने लगा,-बहुत दिनों से थी, मेरे मन में यह एक आशाकोई आकर पूछे मुझसे,आज समझाता हूँ मैं तुम्हें, अपनी मूक भाषा।हाँ, अपनी मूक भाषा…जब कोई मुझे ईश्वर के शीश है चढ़ाता,प्रभु के … Read more